(फाइल फोटो के साथ)
नयी दिल्ली, 13 जुलाई (भाषा) केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने सोमवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (एडीएजी) और उसकी कंपनियों से जुड़े कथित बड़े पैमाने पर बैंकिंग धोखाधड़ी के संबंध में दर्ज कुल सात प्राथमिकियों में से तीन में आरोपपत्र दाखिल कर दिये हैं।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ को सीबीआई की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि बाकी चार मामलों में जांच जारी है।
शीर्ष अदालत ने मेहता की दलील का संज्ञान लेते हुए सीबीआई को जांच में हुई प्रगति पर ‘वस्तुस्थिति रिपोर्ट’ दाखिल करने का निर्देश दिया।
शीर्ष अदालत ने यह भी दर्ज किया कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने संबंधित धनशोधन मामलों में अभियोजन शिकायत भी दाखिल कर दी है, जो आरोपपत्र के समान होती है
सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता और पूर्व नौकरशाह ई ए एस सरमा की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया कि इन मामलों के मुख्य सूत्रधार अनिल अंबानी को अब तक गिरफ़्तार नहीं किया गया है।
उन्होंने कहा कि जून तक तीन आरोपपत्र दाखिल कर दिये गये, लेकिन सीबीआई ने इस मामले में कोई वस्तुस्थिति रिपोर्ट दाखिल नहीं की है।
भूषण ने कहा कि भले ही सेबी ने अनिल अंबानी की ‘अहम’ भूमिका का ज़िक्र किया है, लेकिन सीबीआई की वस्तुस्थिति रिपोर्ट में इस बारे में कुछ भी नहीं बताया गया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि अनिल अंबानी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है और सिर्फ अपेक्षाकृत निचले स्तर के अधिकारियों को ही गिरफ्तार किया गया है।
भूषण ने कहा, ‘मैं कह रहा हूं कि उन्होंने (सीबीआई ने) उनकी भूमिका के बारे में जो कुछ भी पाया है, उसे आपके समक्ष (न्यायालय के सामने) बताना चाहिए। साल 2025 के एक आरोप पत्र में सीबीआई कहती है कि वह मुख्य सूत्रधार थे। सेबी भी कहती है कि वह मुख्य सूत्रधार थे।’
सॉलिसिटर जनरल ने भूषण की दलीलों का खंडन किया और शीर्ष अदालत से कहा कि यह कहना गलत है कि सिर्फ निचले स्तर के अधिकारियों को ही गिरफ़्तार किया गया है।
उन्होंने कहा कि प्रबंध निदेशक और कार्यकारी भी गिरफ़्तार किये गये हैं।
शीर्ष अदालत ने कहा कि कोई निर्देश देना उचित नहीं होगा। पीठ ने भूषण से कहा कि वह अनिल अंबानी की भूमिका के बारे में आरोपपत्र देखें।
अनिल अंबानी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि ऐसी टिप्पणी से उनके पक्ष को नुकसान हो सकता है।
सिब्बल ने कहा, ‘‘आरोपपत्र दाखिल हो जाने के बाद भी अदालत ने अभी तक मामले का संज्ञान नहीं लिया है। इस अदालत ने कभी भी इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया है।’’
शीर्ष अदालत ने कहा कि वह इस बात को लेकर सचेत है कि खंडपीठ की ओर से ऐसी कोई बात नहीं कही जानी चाहिए, जिससे किसी पक्ष को नुकसान हो।
जांच एजेंसियों की ओर से पेश मेहता ने पहले शीर्ष अदालत को बताया था कि कुल नौ प्राथमिकी दर्ज हैं, जिनमें से सात की जांच चल रही है।
उन्होंने कहा था, ‘‘इन सात मामलों में कुल 27,337 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।’’
इससे पहले, उच्चतम न्यायालय ने एडीएजी और उसकी कंपनियों से जुड़े कथित बड़े पैमाने पर बैंकिंग धोखाधड़ी की जांच में सीबीआई और ईडी द्वारा दिखाई गई ‘अनिच्छा’ पर नाराजगी जताई थी।
शीर्ष अदालत ने सीबीआई और ईडी को इस मामले में समयबद्ध तरीके से ‘निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच’ करने के निर्देश दिये थे।
जब याचिकाकर्ता ने अनिल अंबानी के देश से भाग जाने की आशंका जतायी, तब उन्होंने शीर्ष अदालत को आश्वस्त किया था कि वह अदालत की मंज़ूरी के बिना देश छोड़कर नहीं जाएंगे।
ईडी ने ‘सार्वजनिक धन के बड़े पैमाने पर हेरफेर’ का हवाला देते हुए, रिलायंस होम फाइनेंस में 7,500 करोड़ रुपये और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस में 8,200 करोड़ रुपये की अदायगी में चूक (डिफ़ॉल्ट) का आरोप लगाया था।
रिलायंस पावर के मामले में, ईडी की रिपोर्ट में कहा गया है कि वह ‘सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया’ को फ़र्ज़ी बैंक गारंटी सौंपने की जांच कर रही है, जिससे 105 करोड़ रुपये से ज़्यादा का नुकसान हुआ। इस रिपोर्ट को पहले खंडपीठ ने रिकॉर्ड पर लिया था।
जनहित याचिका में अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस एडीएजी की कई कंपनियों में सार्वजनिक धन के व्यवस्थित हेरफेर, वित्तीय विवरणों में जालसाजी और संस्थागत मिलीभगत का आरोप लगाया गया।
इसमें दावा किया गया है कि 2013 और 2017 के बीच, आरकॉम, रिलायंस इन्फ्राटेल और रिलायंस टेलीकॉम ने भारतीय स्टेट बैंक की अगुवाई वाले बैंकों के एक समूह से 31,580 करोड़ रुपये का ऋण लिया था।
भाषा राजकुमार दिलीप
दिलीप