अहमदाबाद, 24 सितंबर (भाषा) गुजरात के गांधीनगर के एक सत्र न्यायालय ने अदाणी एंटरप्राइजेज की ओर से दायर आपराधिक मानहानि मामले में पेश नहीं होने के कारण गिरफ्तार किये गये पत्रकार रवि नायर को एक सप्ताह बाद बृहस्पतिवार को जमानत दे दी।
नायर के वकील रोनित जॉय ने बताया कि प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश आशीष जे. मल्होत्रा ने 17 सितंबर को गिरफ्तार किये गये उनके मुवक्किल की जमानत याचिका स्वीकार कर ली।
इसी अदालत ने नायर के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था।
अदालत ने मामले में दोषसिद्धि के खिलाफ दायर अपील की सुनवाई के दौरान व्यक्तिगत रूप से पेश नहीं होने पर नायर के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था।
नायर के वकील ने कहा, ‘‘जमानत याचिका शनिवार को सत्र न्यायालय में दाखिल की गई थी और सोमवार को उस पर सुनवाई हुई। आज (बृहस्पतिवार को) अदालत ने उनकी याचिका स्वीकार कर ली।’’
नायर ने सत्र न्यायालय में जमानत याचिका दायर करने के साथ ही गुजरात उच्च न्यायालय में गैर-जमानती वारंट पर रोक लगाने के लिए भी याचिका दाखिल की थी।
उच्च न्यायालय ने हालांकि बुधवार को उन्हें अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया और नायर के वकील से यह जानकारी नहीं देने पर सवाल किया कि उन्होंने इसी मामले में सत्र अदालत में जमानत के लिए भी अर्जी दी है।
उच्च न्यायालय ने कहा कि अगर अदालत को यह जानकारी दी गई होती तो संभव है कि शनिवार को मामले की तत्काल सुनवाई की अनुमति नहीं मिलती। गांधीनगर की एक अदालत ने नायर को अदाणी एंटरप्राइजेज की ओर से तीन सितंबर, 2021 को दायर आपराधिक मानहानि मामले में 10 फरवरी, 2026 को एक साल के कारावास की सजा सुनाई थी।
यह मामला नायर से जुड़े कुछ ट्वीट और लेखों को लेकर दायर किया गया था।
पत्रकार ने गांधीनगर की अपीलीय अदालत में अपनी दोषसिद्धि को चुनौती दी थी।
अदालत ने नौ मार्च, 2026 को इस शर्त पर उन्हें जमानत दी थी कि वह अपनी अपील की सुनवाई के दौरान अदालत में मौजूद रहेंगे।
नायर के वकील ने बताया कि तीन सितंबर, 2026 को हुई सुनवाई में वह व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो सके, क्योंकि उनकी तबीयत खराब थी और उन्हें अपने गृह राज्य केरलम से यात्रा करनी थी।
अपीलीय अदालत ने व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट की उनकी याचिका खारिज कर दी और उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया।
अदालत ने 17 सितंबर को याचिकाकर्ता को हिरासत में लेने का निर्देश दिया, जिसके बाद उन्हें जेल भेज दिया गया।
उच्च न्यायालय ने शनिवार शाम उसकी याचिका पर सुनवाई की। मुख्य न्यायाधीश के समक्ष एक नोट पेश कर मामले की तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया गया था, जिसमें कहा गया था कि यह मामला संविधान के अनुच्छेद 21 और किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़ा है।
भाषा जितेंद्र पवनेश
पवनेश