चेन्नई, 22 सितंबर (भाषा) द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) प्रमुख एमके स्टालिन ने मंगलवार को मद्रास उच्च न्यायालय से कहा कि तमिलनाडु के लोक निर्माण मंत्री आधव अर्जुन की ओर से उन पर लगाया गया मानहानि का आरोप बेबुनियाद है।
स्टालिन ने कहा कि पार्टी सदस्यों की किसी भी व्यक्तिगत हरकत के लिए उन्हें जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने अर्जुन की ओर से दायर मुकदमा खारिज करने और मंत्री पर भारी जुर्माना लगाने का अनुरोध किया।
स्टालिन ने ये दलीलें अर्जुन की ओर से उनके और द्रमुक की आईटी शाखा के खिलाफ दायर एक करोड़ रुपये के मानहानि मामले में दाखिल जवाबी हलफनामे में दीं।
अर्जुन का मुकदमा द्रमुक की आईटी शाखा के एक सोशल मीडिया पोस्ट पर आधारित है, जिसमें कथित तौर पर दावा किया गया था कि मादक पदार्थ की तस्करी से जुड़े मामले का एक आरोपी (जॉन ब्रिटो) अर्जुन का रिश्तेदार है।
न्यायमूर्ति के गोविंदराजन थिलकावडी के समक्ष सुनवाई के दौरान स्टालिन ने उनके खिलाफ दायर मानहानि मुकदमे में अंतरिम राहत देने के अनुरोध वाली याचिका का विरोध किया।
न्यायमूर्ति थिलकावडी ने मामले की सुनवाई 26 अक्टूबर तक के लिए स्थगित कर दी।
द्रमुक प्रमुख ने खास तौर पर इस आरोप से इनकार किया कि कथित पोस्ट “उनकी किसी योजना, निर्देश, आदेश या मंजूरी के तहत” प्रसारित की गई थी।
स्टालिन ने कहा कि उन्होंने द्रमुक की आईटी शाखा को कोई ऐसा पोस्ट प्रसारित करने का निर्देश या मंजूरी नहीं दी, जिसमें आवेदक (आधव अर्जुन) या उसके परिवार के किसी सदस्य को जॉन ब्रिटो या मादक पदार्थ की तस्करी से संबंधित किसी मामले से जोड़ा गया हो।
स्टालिन ने कहा कि असल बात यह है कि “जॉन ब्रिटो मीडिया के सामने आया था और दावा किया था कि वह विधायक लीमारोज का भाई है, जो और कोई नहीं, बल्कि याचिकाकर्ता (आधव अर्जुन) की सास हैं।”
उन्होंने कहा कि यह भी एक तथ्य है कि लीमारोज के भाई जॉन ब्रिटो के खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं।
भाषा पारुल वैभव
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