नयी दिल्ली, तीन जुलाई (भाषा) सूर्य का अध्ययन करने वाले भारत के पहले अंतरिक्ष आधारित मिशन ‘आदित्य-एल1’ ने सौर ज्वालाओं के दौरान वहां ‘आयरन फ्लोरेसेंस’ की एक अनोखी घटना दर्ज की है। यह जानकारी एक नए अध्ययन में सामने आई।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि यह आयरन फ्लोरेसेंस (लौह प्रतिदीप्ति) की घटना एक विशाल सौर ज्वाला के दौरान होती है, जो सूर्य के ऊपरी वायुमंडल (कोरोना) को अत्यधिक उच्च तापमान तक गर्म कर देती है, जिससे उच्च-ऊर्जा एक्स-रे की भारी मात्रा में तरंगें उत्सर्जित होती हैं।
इनमें से ज्यादातर एक्स-रे किरण अंतरिक्ष की ओर बाहर निकल जाती हैं, लेकिन उनका एक हिस्सा नीचे की ओर भी जाता है और सूर्य की ठंडी तथा अधिक घनी सतह परत, जिसे ‘फोटोस्फीयर’ कहा जाता है, से टकराता है।
आदित्य-एल1 के ‘सोलर लो एनर्जी एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर’ (एसओएलईएक्सएस) में इस घटना का पता लगाने की क्षमता है।
‘सोलर फिजिक्स’ पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन में कहा गया है कि ‘आयरन फ्लोरेसेंस’ की देखी गई चमक इस बात पर काफी निर्भर करती है कि सौर ज्वाला ‘सन डिस्क’ (सौर सतह) के किस स्थान पर उत्पन्न होती है।
भाषा
देवेंद्र नेत्रपाल
नेत्रपाल