दशकों की उपेक्षा के बाद मोदी सरकार में ‘वंदे मातरम्’ को मिला उचित सम्मान: अमित शाह

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दशकों की उपेक्षा के बाद मोदी सरकार में 'वंदे मातरम्' को मिला उचित सम्मान: अमित शाह

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  • Publish Date - August 21, 2026 / 09:33 PM IST,
    Updated On - August 21, 2026 / 09:33 PM IST

सिलीगुड़ी, 21 अगस्त (भाषा) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछली सरकारों ने ‘वंदे मातरम्’ को उचित सम्मान नहीं दिया, जबकि नरेन्द्र मोदी सरकार के तहत इस साल स्वतंत्रता दिवस समारोह में राष्ट्रगीत को उसका उचित स्थान मिला।

उत्तरी बंगाल के दौरे के दौरान यहां एक सभा को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि आजादी के 80 साल बाद लाल किले पर राष्ट्रगीत का पूरा गायन सुनकर उन्हें प्रसन्नता हुई।

शाह ने कहा कि उन्हें इस बात का दुख है कि देश की आजादी के बाद से पिछली सरकारों ने राष्ट्रगीत को वह सम्मान नहीं दिया, जिसका यह हकदार था।

उन्होंने कहा, ‘इस साल स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान लाल किले पर वंदे मातरम् का पूरा संस्करण पहली बार गाया गया, जहां इस गीत को वह सम्मान मिला जिसका यह हकदार है। मुझे इस बात से प्रसन्नता हुई है कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचे गए इस गीत को देश ने आखिरकार उसकी रचना के 150वें साल में पहचान दी है।’’

उन्होंने कहा कि बंकिम बाबू की यह अमर रचना न केवल स्वतंत्रता आंदोलन को गति देने वाली बनी, बल्कि इसने यह लक्ष्य भी सामने रखा कि आजाद भारत कैसा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रगीत और उपन्यास ‘आनंदमठ’ की रचना कर उन्होंने स्वतंत्र भारत को सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के मार्ग पर आगे बढ़ने की जरूरत बताई थी।

गृह मंत्रालय की ओर से लाए गए उस कानून को शाह ने ‘ऐतिहासिक फैसला’ बताया, जिसके तहत ‘वंदे मातरम्’ के पूरे संस्करण को सरकारी कार्यक्रमों का हिस्सा बनाया गया।

शाह का यह बयान ‘वंदे मातरम्’ के गायन को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच जारी राजनीतिक विवाद के बीच आया है।

कांग्रेस कार्य समिति ने 1937 के अपने प्रस्ताव का हवाला देते हुए पार्टी कार्यक्रमों में गीत का केवल पहला दो अंतरा गाने का फैसला किया है। शाह ने इस निर्णय की कड़ी आलोचना की है।

इससे पहले शुक्रवार को उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस का फैसला संसद द्वारा पारित क़ानून का उल्लंघन है।

उन्होंने कांग्रेस पर यह भी आरोप लगाया कि 1937 में उसने ‘तुष्टीकरण और वोट बैंक की राजनीति’ के कारण गीत को दो हिस्सों में बांट दिया था।

भाषा

शुभम सुरेश

सुरेश