केजरीवाल, सिसोदिया के बाद दुर्गेश पाठक ने भी न्यायमूर्ति शर्मा के सामने पेश होने से इनकार किया

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केजरीवाल, सिसोदिया के बाद दुर्गेश पाठक ने भी न्यायमूर्ति शर्मा के सामने पेश होने से इनकार किया

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  • Publish Date - April 29, 2026 / 07:03 PM IST,
    Updated On - April 29, 2026 / 07:03 PM IST

नयी दिल्ली, 29 अप्रैल (भाषा) आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के बाद पार्टी नेता दुर्गेश पाठक ने भी दिल्ली उच्च न्यायालय में आबकारी ‘घोटाला’ मामले की सुनवाई में न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा के सामने पेश होने से इनकार कर दिया है।

पाठक ने न्यायमूर्ति शर्मा को एक पत्र भेजा है, जिसमें उन्होंने लिखा है कि वह सुनवाई के सिलसिले में केजरीवाल की ओर से जताई गई चिंताओं से सहमत हैं।

केजरीवाल ने न्यायमूर्ति शर्मा पर हितों के टकराव का आरोप लगाते हुए घोषणा की है कि वह आबकारी मामले की सुनवाई में व्यक्तिगत स्तर पर या किसी वकील के माध्यम से हिस्सा नहीं लेंगे।

पाठक, सिसोदिया और केजरीवाल केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की ओर से दायर उस पुनर्विचार याचिका में पक्षकार हैं, जिसमें आबकारी नीति मामले में उन्हें आरोपमुक्त किए जाने के फैसले को चुनौती गई है।

पाठक ने पत्र में कहा, “यह पत्र उस पुनर्विचार याचिका के सिलसिले में है, जो वर्तमान में इस अदालत के समक्ष विचाराधीन है।”

‘आप’ नेता ने लिखा कि उन्होंने केजरीवाल के 27 अप्रैल के पत्र को पढ़ने के बाद यह फैसला लिया, जिसमें सुनवाई में निष्पक्षता और पारदर्शिता की कमी को लेकर चिंता जताई गई थी।

उन्होंने कहा, “इसी के मद्देनजर मैंने भी वर्तमान सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से या किसी वकील के माध्यम से हिस्सा न लेने का संकल्प लिया है। इस मामले में मेरी ओर से पेश वकालतनामा, यदि कोई हो तो, उसे विधिवत रूप से वापस लिया हुआ माना जाए।”

पाठक ने कहा कि उनके पत्र अदालत के प्रति अनादर के संकेत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने संविधान और न्यायपालिका में अपनी आस्था दोहराई।

पाठक ने कहा, “मैं इस अवसर पर भारत के संविधान और इस देश की न्यायपालिका की संस्थागत अखंडता में अपनी अटूट आस्था की स्पष्ट रूप से पुष्टि करता हूं।”

उन्होंने अनुरोध किया कि पत्र को रिकॉर्ड में लिया जाए और अदालत की ओर से उचित एवं न्यायसंगत समझे जाने वाले तरीके से सुनवाई की जाए।

इस बीच, दिल्ली विधानसभा में विपक्ष की नेता आतिशी ने सवाल उठाया कि केजरीवाल के चिंता जताने के बाद न्यायमूर्ति शर्मा ने खुद को आबकारी मामले की सुनवाई से अलग क्यों नहीं कर लिया।

आतिशी ने दावा किया कि न्यायमूर्ति शर्मा ने हाल में अन्य मामलों में ऐसा किया था। उन्होंने पूछा कि मौजूदा मामले में ऐसा क्या भिन्न है कि सुनवाई से अलग होने पर विचार नहीं किया गया।

भाषा पारुल पवनेश

पवनेश