कैंसर की वजह बताएगा एआई मंच

Ads

कैंसर की वजह बताएगा एआई मंच

  •  
  • Publish Date - August 20, 2026 / 04:55 PM IST,
    Updated On - August 20, 2026 / 04:55 PM IST

नयी दिल्ली, 20 अगस्त (भाषा) कैंसर क्यों होता है? दिल्ली के इंद्रप्रस्थ इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के शोधकर्ता इस अहम सवाल का जवाब तलाशने की दिशा में एक कदम आगे बढ़े हैं। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर आधारित एक मंच तैयार किया है, जो डीएनए को हुए नुकसान को समझने और यह पता लगाने में मदद करता है कि कैंसर की शुरुआत किन कारणों से हुई।

शोधकर्ताओं के मुताबिक, ‘म्यूटएआईवर्स’ जनरेटिव एआई पर आधारित अपनी तरह का पहला मंच है। उन्होंने बताया कि गुवाहाटी में सिर और गर्दन के कैंसर से पीड़ित 27 मरीजों पर परीक्षण के दौरान ‘म्यूटएआईवर्स’ ने तंबाकू के सेवन को बीमारी की जड़ के रूप में पहचाना।

‘जनरेटिव एआई’ एक ऐसी प्रौद्योगिकी है, जिसे बड़ी मात्रा में डेटा के आधार पर प्रशिक्षित किया जाता है। यह चित्र, ऑडियो और वीडियो समेत अन्य सामग्री तैयार कर सकता है तथा उपयोगकर्ता के प्राकृतिक भाषा में दिए गए निर्देशों का जवाब दे सकता है।

हालांकि, शोधकर्ताओं ने कहा कि एआई भले ही कैंसर के उभार को समझने के लिए अतिरिक्त जानकारी उपलब्ध कराता है, लेकिन अपने मौजूदा स्वरूप में यह पक्के तौर पर साबित नहीं करता कि किसी खास चीज के संपर्क में आने से डीएनए को हुआ नुकसान ही कैंसर का कारण बना।

शोध दल में गुवाहाटी स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (एनआईपीईआर) और वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर)- इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी (आईजीआईबी) के शोधकर्ता भी शामिल थे।

शोधकर्ताओं ने कहा कि उनका शोध केवल बीमारी की पहचान तक सीमित रहने के बजाय उसके कारणों पर ध्यान केंद्रित करता है और यह एक उपयोगी जांच उपकरण साबित हो सकता है।

मुख्य शोधकर्ता और आईआईआईटी-दिल्ली के कंप्यूटेशनल बायोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर गौरव आहूजा ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “कोई भी इस बात पर चर्चा नहीं करता कि कैंसर किस वजह से हुआ। आप किस चीज के संपर्क में आए? क्या आप प्रदूषण के संपर्क में थे? क्या आप दूषित पानी के संपर्क में थे? या फिर आप सिगरेट के धुएं के संपर्क में थे? इसकी जानकारी आपको कोई नहीं देता।”

उन्होंने कहा कि हम जिस वातावरण में रहते हैं, वहां हम लगातार कई तरह के रसायनों के संपर्क में आते रहते हैं, जो डीएनए में बदलाव पैदा कर सकते हैं।

आहूजा ने कहा, “मेरे विचार से यह शोध एक अहम सफलता है, क्योंकि लोग अब सिर्फ इस बात पर चर्चा नहीं कर रहे हैं कि किसी व्यक्ति को कैंसर हो गया, बल्कि इस बारे में भी बात कर रहे हैं कि पीड़ित व्यक्ति किन चीजों के संपर्क में आया था। इससे परिवार के अन्य सदस्यों को भी बचाने में मदद मिल सकती है, खासकर तब जब वे उस इलाके में रहते हों, जहां संबंधित चीज का असर या मौजूदगी ज्यादा हो।”

यह शोध ‘जर्नल ऑफ केमइंफॉर्मेटिक्स’ में प्रकाशित किया गया है।

आहूजा ने बताया कि ‘म्यूटएआईवर्स’ मशीन-लर्निंग पर आधारित ‘एडक्टलिंकर’ नाम के एक ‘बैकट्रैकिंग टूल’ से लैस है।

उन्होंने बताया कि कैंसर से जूझ मरीज के ट्यूमर में क्षतिग्रस्त डीएनए मिलने पर ‘एडक्टलिंकर’ “अपराधी तक पहुंचने के लिए सबूतों की कड़ी जोड़ने वाले जासूस की तरह काम करता है”, जिससे हमें उस पर्यावरणीय रसायन ‘जीनोटॉक्सिन’ या ‘कार्सिनोजन’ का पता लगाने में मदद मिलती है, जो कैंसर का मूल कारण बना।

भाषा पारुल मनीषा

मनीषा