चेन्नई, 27 मई (भाषा) करीब दो सप्ताह तक जारी मतभेदों के बाद अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) के गुटों में बुधवार को सुलह हो गई।
बागी खेमे ने दावा किया कि पार्टी में कोई विभाजन नहीं था, बल्कि केवल “मतभेद” थे, जिसके चलते षणमुगम-वेलुमणि गुट के कुछ विधायकों ने विश्वास मत के दौरान पार्टी प्रमुख ई. के. पलानीस्वामी की लाइन से अलग रुख अपनाते हुए तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) सरकार का समर्थन किया था।
पार्टी सूत्रों ने बताया कि पूर्व राज्य मंत्री एस. पी. वेलुमणि के नेतृत्व में बागी विधायकों ने यहां ग्रीनवेज रोड स्थित पलानीस्वामी के आवास पर उनसे मुलाकात की और अन्नाद्रमुक महासचिव के प्रति समर्थन जताया।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, सी वे षणमुगम की अनुपस्थिति स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही थी लेकिन वेलुमणि ने दावा किया कि वह उनके साथ हैं।
पलानीस्वामी से मुलाकात के कुछ ही समय बाद, वेलुमणि ने तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष जे सी डी प्रभाकर से मुलाकात की।
पार्टी के कद्दावर नेता वेलुमणि ने संवाददाताओं से बात करते हुए अन्नाद्रमुक में फूट डालने के आरोपों से इनकार किया। साथ ही, उन्होंने पलानीस्वामी समर्थकों के इस आरोप का भी खंडन किया कि उनके समूह ने 13 मई को हुए विश्वास मत में टीवीके सरकार के पक्ष में मतदान किया था, ताकि उन्हें सरकार में उच्च पद मिल सकें।
इससे पहले वेलुमणि के साथ करीब 13 विधायक मौजूद थे। हालांकि पूर्व राज्य मंत्री सी. वे. षणमुगम इस बैठक से नदारद रहे। उन्होंने वेलुमणि और अन्य विधायकों के साथ मिलकर पार्टी से तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) सरकार को समर्थन देने की मांग की थी।
हालांकि, वेलुमणि ने कहा कि षणमुगम भी उनके साथ थे।
उन्होंने कहा, “हम पलानीस्वामी से मुलाकात से पहले षणमुगम के कार्यालय से ही आए हैं। हम सभी एकजुट हैं।”
पलानीस्वामी से मुलाकात के तुरंत बाद वेलुमणि ने पूर्व मंत्री डॉ. सी. विजयभास्कर, उनके समर्थक विधायकों और पलानीस्वामी समर्थक ए.एस.एस. कृष्णमूर्ति समेत वरिष्ठ नेताओं के साथ तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष जे.सी.डी. प्रभाकर से मुलाकात की।
इस दौरान उन्होंने एक पत्र सौंपकर प्रभाकर से कहा कि अब वे विधानसभा में एकजुट होकर एक ही पार्टी के रूप में काम करेंगे।
विजयभास्कर ने पूर्व का अपना वह पत्र भी वापस ले लिया जिसमें उन्होंने अध्यक्ष से उन्हें पार्टी के सचेतक के रूप में मान्यता देने का अनुरोध किया था।
विधानसभा अध्यक्ष प्रभाकर ने कहा कि अन्नाद्रमुक विधायकों द्वारा सौंपे गए पत्र पर वह बृहस्पतिवार को अपना फैसला सुनाएंगे।
अध्यक्ष से मुलाकात के बाद वेलुमणि ने संवाददाताओं से कहा, “मीडिया में जैसा दिखाया गया, अन्नाद्रमुक में वैसा कोई विभाजन नहीं है। केवल मतभेद थे, जिन्हें अब सुलझा लिया गया है।”
उन्होंने कहा कि 23 अप्रैल को हुए विधानसभा चुनाव में हार के बाद उन्होंने और अन्य नेताओं ने पार्टी के प्रदर्शन की समीक्षा तथा हार के कारणों का विश्लेषण करने के लिए बैठक बुलाने की मांग की थी। इसी दौरान उनके एक धड़े ने विधानसभा में टीवीके सरकार के समर्थन में रुख अपनाया था।
वेलुमणि ने कहा, “आज अग्रि एस एस कृष्णमूर्ति और अन्य विधायकों द्वारा विधानसभा अध्यक्ष को दी गई याचिका तथा बागी खेमे के 22 विधायकों द्वारा दलबदल विरोधी कानून के तहत विधायकों को अयोग्य ठहराने की मांग वाली याचिका, दोनों वापस ले ली गईं।”
पलानीस्वामी के करीबी माने जाने वाले वेलुमणि ने कहा कि पलानीस्वामी ने पार्टी के प्रदर्शन की समीक्षा और हार के कारणों की जांच के लिए चरणबद्ध तरीके से समिति गठित करने की उनकी मांग पर विचार करने पर सहमति जताई है।
उन्होंने कहा, “हम अन्नाद्रमुक में हैं और महासचिव की अपील के बाद पार्टी एकजुट और मजबूती से काम करेगी।”
इस दौरान, अन्नाद्रमुक के चार विधायकों ने इस्तीफा दे दिया और मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली टीवीके में शामिल हो गए।
इसके परिणामस्वरूप, 234 सदस्यीय विधानसभा में पार्टी की संख्या 47 से घटकर 43 हो गई।
भाषा
राखी मनीषा
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