टीवीके में शामिल हुए अन्नाद्रमुक सदस्यों को पछतावा होगा, मूल संगठन में लौट आएंगे: दिनाकरन

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टीवीके में शामिल हुए अन्नाद्रमुक सदस्यों को पछतावा होगा, मूल संगठन में लौट आएंगे: दिनाकरन

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  • Publish Date - June 11, 2026 / 04:30 PM IST,
    Updated On - June 11, 2026 / 04:30 PM IST

चेन्नई, 11 जून (भाषा) अम्मा मक्कल मुनेत्र कषगम (एएमएमके) प्रमुख टीटीवी दिनाकरन ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि अन्नाद्रमुक के जो सदस्य सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) में शामिल हुए हैं, उन्हें अपने फैसले पर पछतावा होगा और वे जल्द ही मूल संगठन में लौट आएंगे।

सरकार गठन में टीवीके का समर्थन करने वाली कुछ राजनीतिक पार्टियों पर निशाना साधते हुए दिनाकरन ने कहा कि उनके (टीवीके में शामिल होने वाले नेताओं के) विपरीत, वह राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के प्रति निष्ठावान रहने के अपने रुख पर अडिग हैं और टीवीके का समर्थन करने का उनका कोई इरादा नहीं है।

उन्होंने इस दावे को भी गलत बताया कि अगर मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय सरकार नहीं बनाते तो राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू हो जाता।

द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के सहयोगी दलों — वीसीके, वामपंथी पार्टियों और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) — ने विजय के नेतृत्व वाली सरकार को अपना समर्थन दिया है। इसके पीछे उन्होंने यह तर्क दिया था कि यदि कोई पार्टी सरकार गठन नहीं कर पाती है तो राज्य में राष्ट्रपति शासन लग सकता है। कांग्रेस, जिसने द्रमुक से गठबंधन तोड़ लिया था, के साथ-साथ वीसीके और आईयूएमएल भी विजय की कैबिनेट में शामिल हो गई।

एएमएमके महासचिव ने ऑल इंडिया द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) में अपनी पार्टी का विलय करने की किसी भी योजना से इनकार करते हुए कहा, ‘‘2021 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद भी, मैंने अन्य नेताओं की तरह निजी फायदे के लिए पाला बदलने के बजाय राजग का हिस्सा बने रहना ही बेहतर समझा।’’

एएमएमके का अन्नाद्रमुक में विलय न करने के अपने फैसले के बारे में बताते हुए, दिनाकरन ने पत्रकारों से कहा कि वह गठबंधन धर्म का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘2017 में (अन्नाद्रमुक) उपमहासचिव रहने के बावजूद मुझे अन्नाद्रमुक से हटा दिया गया था, लेकिन अम्मा (दिवंगत मुख्यमंत्री जे. जयललिता) के सम्मान में मैंने छह महीने तक धैर्य बनाए रखा।’’

बाद में, उन्होंने एएमएमके बनाई और अब भी इसके महासचिव हैं।

दिनाकरन ने कहा कि अन्नाद्रमुक के नेताओं, जिला सचिवों या पार्टी पदाधिकारियों ने विलय या उस पर किसी सहमति के लिए औपचारिक प्रस्ताव के साथ उनसे संपर्क नहीं किया है।

दिनाकरन ने कहा, ‘‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अन्नाद्रमुक के हमारे कुछ साथी टीवीके में शामिल हो गए। उन्हें निश्चित रूप से इसका पछतावा होगा और वे जल्द ही मूल संगठन में लौट आएंगे।’’

उन्होंने टीवीके सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए इसे पूर्ववर्ती द्रमुक सरकार का ही विस्तार बताया। उन्होंने दावा किया कि सरकार बदलने के बाद से झपटमारी और महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ गए हैं।

भाषा सुभाष पवनेश

पवनेश