नयी दिल्ली, 11 अप्रैल (भाषा) कांग्रेस नेता शशि थरूर ने संसद के तीन दिवसीय सत्र जिसमें महिला आरक्षण कानून में संशोधन किए जाने की संभावना है, से पहले शनिवार को कहा कि प्रस्तावित संशोधनों को एक राजनीतिक औजार के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए, जो संघीय ढांचे को कमजोर करे और संसद की जीवंतता को प्रभावित करे।
थरूर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में आरोप लगाया कि सरकार 2029 के आम चुनावों से पहले होने वाले परिसीमन के मद्देनजर एवं राज्य चुनावों से पहले राजनीतिक लाभ लेने के लिए संसद का ‘विशेष सत्र’ बुला रही है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन यह आरक्षण समावेशी और न्यायोचित होना चाहिए।
थरूर ने शुक्रवार को महिला आरक्षण कानून (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) में प्रस्तावित संशोधनों पर मुख्य विपक्षी पार्टी का रुख स्पष्ट करने के लिए आयोजित कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में अपनी तस्वीरें साझा करते हुए कहा, ‘‘हालांकि कांग्रेस हमेशा से 33 प्रतिशत आरक्षण की समर्थक रही है और 2013 में राज्यसभा में विधेयक पेश करने और उसे पारित कराने वाली पहली पार्टी भी रही है, लेकिन मौजूदा सरकार का दृष्टिकोण गंभीर चिंता का विषय है।’’
कांग्रेस की यह बैठक संसद के तीन दिवसीय सत्र से कुछ दिन पहले हुई। इस दौरान सरकार 2029 के संसदीय चुनावों से पहले कानून को लागू करने और लोकसभा सीट की संख्या बढ़ाकर 816 करने के लिए विधेयक लाएगी, जिनमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
थरूर ने रेखांकित किया, ‘‘सीडब्ल्यूसी ने विपक्षी दलों से परामर्श किए बिना सरकार द्वारा एकतरफा और अपारदर्शी तरीके से संशोधनों को आगे बढ़ाने की निंदा की। पार्टी ने चिंता जताई कि विधेयक के साथ परिसीमन प्रक्रिया को जल्दबाजी में कराने से हमारे राज्यों, विशेष रूप से दक्षिण और पूर्वोत्तर राज्यों के लोकतांत्रिक संतुलन के लिए खतरनाक परिणाम हो सकते हैं।’’
तिरुवनंतपुर से लोकसभा सदस्य ने कहा कि कई कांग्रेस नेताओं ने इस बात पर प्रकाश डाला कि सरकार ने शुरुआत में जनगणना के बाद तक महिला आरक्षण के कार्यान्वयन को टाला था।
उन्होंने कहा, ‘‘अब, राज्य चुनावों से पहले राजनीतिक लाभ लेने के लिए और 2029 के आम चुनाव से पहले परिसीमन के मद्देनजर ‘विशेष सत्र’ का उपयोग किया जा रहा है।’’
कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘कांग्रेस महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण को लेकर प्रतिबद्ध है, लेकिन यह समावेशी और न्यायोचित होना चाहिए। संशोधन विधेयक एक राजनीतिक हथियार नहीं होना चाहिए जो संघवाद को कमजोर करे और संसद की विचार-विमर्श करने वाली संस्था के रूप में उसकी जीवंतता को धूमिल करे।’’
कांग्रेस ने शुक्रवार को नरेन्द्र मोदी सरकार पर महिला आरक्षण कानून के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाया। विपक्षी पार्टी ने कहा कि इससे जुड़ा प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया ‘संवैधानिक नहीं’ है और इसके ‘गंभीर परिणाम’ हो सकते हैं, जिन पर चल रहे विधानसभा चुनावों के बाद गहन विचार-विमर्श की आवश्यकता है।
भाषा धीरज पवनेश
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