एंटीबायोटिक के प्रति प्रतिरोध सामान्य सर्जरी को भी चुनौतीपूर्ण बना रहा: विशेषज्ञ

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एंटीबायोटिक के प्रति प्रतिरोध सामान्य सर्जरी को भी चुनौतीपूर्ण बना रहा: विशेषज्ञ

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  • Publish Date - July 12, 2026 / 06:11 PM IST,
    Updated On - July 12, 2026 / 06:11 PM IST

(पायल बनर्जी)

नयी दिल्ली, 12 जुलाई (भाषा) एंटीबायोटिक समेत अन्य रोगाणुरोधी दवाओं के प्रति बढ़ता प्रतिरोध (एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस) अब आम सर्जरी को भी चुनौतीपूर्ण बना रहा है। शल्य चिकित्सकों का कहना है कि असरदार एंटीबायोटिक दवाओं के बेअसर होने से सुरक्षित सर्जरी के क्षेत्र में दशकों की तरक्की पर पानी फिर सकता है और सर्जरी के बाद जानलेवा संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।

शल्य चिकित्सकों का कहना है कि सर्जरी वाली जगह पर संक्रमण को रोकने के लिए एंटीबायोटिक बहुत जरूरी हैं, लेकिन इनके अंधाधुंध इस्तेमाल से बैक्टीरिया आदि में एंटीबायोटिक के प्रति प्रतिरोध बढ़ा है।

इससे अस्पतालों को एंटीबायोटिक के इस्तेमाल को लेकर सख़्त नियम अपनाने पड़ रहे हैं और लंबे समय तक एंटीबायोटिक देने के बजाय संक्रमण से बचाव के तरीकों पर अधिक जोर देना पड़ रहा है।

सीताराम भरतिया अनुसंधान एवं विज्ञान संस्थान में जनरल सर्जरी के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अमरचंद बजाज ने कहा कि आधुनिक सर्जरी जितनी सर्जिकल स्किल पर निर्भर करती है, उतनी ही असरदार एंटीबायोटिक्स पर भी।

बजाज ने कहा, ‘‘चाहे अपेंडेक्टॉमी हो, पित्ताशय की सर्जरी हो या पेट की कोई बड़ी सर्जरी, प्रतिरोधक बैक्टीरिया की वजह से संक्रमण का इलाज नहीं हो पाने से मुश्किलें काफ़ी बढ़ सकती हैं और मरीज को अधिक समय तक अस्पताल में रहना पड़ सकता है।’

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, कम और मध्यम आय वाले देशों में सर्जरी वाली जगह पर होने वाले संक्रमण सबसे आम स्वास्थ्यदेखभाल संबंधी संक्रमण हैं, जो सर्जरी कराने वाले 11 प्रतिशत मरीजों को प्रभावित करते हैं।

डब्ल्यूएचओ के वैश्विक दिशानिर्देश में सलाह दी गई है कि सर्जरी से पहले बचाव के तौर पर एंटीबायोटिक आमतौर पर चीरा लगाने से पहले दी जानी चाहिए और अधिकतर मामलों में सर्जरी के बाद इन्हें लगातार नहीं दिया जाना चाहिए, क्योंकि लंबे समय तक इस्तेमाल से फायदा कम होता है और ‘एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध’ का खतरा बढ़ जाता है।

बजाज ने कहा कि मरीजों और कुछ स्वास्थ्य केंद्र में यह गलतफहमी अब भी बनी हुई है कि ‘ज़्यादा एंटीबायोटिक’ का मतलब बेहतर सुरक्षा है।

दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ. आसुरी कृष्णा ने कहा, ‘‘सर्जरी से पहले मुधमेह को नियंत्रित करना, धुम्रपान छोड़ने के लिए प्रोत्साहित करना, ऑपरेशन थिएटर में साफ-सफाई का सख्ती से पालन करना, समय पर एंटीबायोटिक देना और सर्जरी के बाद जल्द ही मरीज को चलाना-फिरना शुरू कराना, ये सभी संक्रमण रोकने के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। सिर्फ एंटीबायोटिक देने से संक्रमण नियंत्रण के खराब तरीकों की भरपाई नहीं हो सकती।’’

दुनिया भर में ‘एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस’ (एएमआर) पहले ही भारी नुकसान पहुंचा रहा है। ‘द लैंसेट’ में प्रकाशित एक व्यापक रूप से चर्चित विश्लेषण का अनुमान है कि 2019 में 12.7 लाख मौतें सीधे तौर पर बैक्टीरिया जनित ‘एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस’ के कारण हुईं, जबकि 49.5 लाख मौतें दवा प्रतिरोधी बैक्टीरिया संबंधी संक्रमण से जुड़ी थीं।

इस तरह एएमआर दुनिया भर में सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़े खतरों में से एक बन गया है।

दिल्ली स्थित एम्स के सर्जरी विभाग के प्रोफ़ेसर डॉ. वी. के. बंसल ने कहा, ‘‘जैसे-जैसे बैक्टीरिया दवा के प्रति ज्यादा प्रतिरोधी होते जा रहे हैं, मौजूदा एंटीबायोटिक की असरदार क्षमता को बनाए रखना हर किसी की जिम्मेदारी है। हर सर्जन, हर अस्पताल और हर मरीज की यह सुनिश्चित करने में भूमिका है कि ये जीवन बचाने वाली दवाएं आने वाली पीढ़ियों के लिए असरदार बनी रहें।’’

भारत ने भी सर्जरी वाली जगह पर होने वाले संक्रमण (एसएसआई) पर व्यवस्थित रूप से नजर रखना शुरू कर दिया है।

आईसीएमआर की अगुवाई में देश भर के अस्पतालों से जुड़े अध्ययन में पाया गया कि सर्जरी वाली जगह पर संक्रमण की कुल दर 5.2 प्रतिशत थी।

भाषा संतोष दिलीप

दिलीप