नयी दिल्ली, 12 अगस्त (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्र की शिकायत अपीलीय समिति से कहा है कि वह शिरडी साईंबाबा को निशाना बनाने वाले कुछ कथित भड़काऊ और अपमानजनक यूट्यूब वीडियो को हटाने के मामले में सात दिन के भीतर फैसला करे।
न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा ने श्री साईंबाबा संस्थान ट्रस्ट (शिरडी) की याचिका पर 11 अगस्त को यह आदेश दिया।
उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘याचिकाकर्ता की शिकायत और याचिका में लगाए गए आरोपों की प्रकृति को देखते हुए यह अदालत यह निर्देश देना उचित समझती है कि याचिकाकर्ता ने ‘शिकायत अपीलीय समिति’ के समक्ष जो वैधानिक अपील दायर की है, उस पर मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए समिति सात दिन के अंदर विचार कर तर्कपूर्ण आदेश पारित करे तथा याचिकाकर्ता को भी इसकी सूचना दे।’’
याचिकाकर्ता का आरोप है कि यूट्यूब पर प्रसारित कुछ वीडियो में शिरडी साईंबाबा और ट्रस्ट के खिलाफ ‘‘झूठे, मानहानिकारक, भड़काऊ और अपमानजनक आरोप’’ लगाए गए हैं, लेकिन इस मंच ने उन्हें हटाने से इनकार कर दिया है।
याचिकाकर्ता ने कहा है कि केंद्र सरकार की शिकायत अपीलीय समिति समेत कई संबंधित तंत्रों से शिकायत करने के बावजूद यह सामग्री अब भी ऑनलाइन उपलब्ध है, जिससे श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं और संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत मिले उनके अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है।
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रमोद कुमार दुबे अदालत में पेश हुए।
उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को सुनवाई की अगली तारीख 19 अगस्त तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि इन वीडियो में ट्रस्ट पर श्रद्धालुओं को गुमराह करने, धार्मिक इतिहास से छेड़छाड़ करने और गलत धार्मिक विमर्श को बढ़ावा देने के झूठे आरोप लगाए गए हैं।
याचिका के मुताबिक, यट्यूब ने सामग्री हटाने से इनकार कर दिया है। उसका कहना है कि कंपनी ‘‘पोस्ट की सच्चाई तय करने की स्थिति में नहीं है और सिर्फ आरोपों के आधार पर वीडियो नहीं हटाती है।’’
यूट्यूब ने याचिकाकर्ता से कहा कि वह या तो सीधे अपलोड करने वालों से संपर्क करे या फिर अदालत जाए।
भाषा
राजकुमार पारुल
पारुल