ईटानगर, 17 सितंबर (भाषा) अरुणाचल प्रदेश के मंत्री पीडी सोना ने बृहस्पतिवार को अकादमिक शिक्षा से आगे बढ़कर बच्चों के नैतिक मूल्यों और भावनात्मक विकास को समान महत्व देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य संवेदनशील और जिम्मेदार व्यक्तियों का निर्माण करना होना चाहिए।
शिक्षा एवं पर्यटन मंत्री सोना ने तवांग जिले में सामाजिक, भावनात्मक और नैतिक (एसईई) शिक्षा पर आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए यह बात कही।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, इस कार्यशाला का आयोजन ‘कार्मकि एवं आध्यात्मिक मामलों के विभाग’ (डीओकेएए) द्वारा ‘थुप्टेन शेड्रुपलिंग फाउंडेशन’ के सहयोग से किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य सामाजिक, भावनात्मक और नैतिक मूल्यों को अकादमिक शिक्षा के साथ जोड़ना है।
मंत्री ने कहा कि राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) ने कक्षा तीन से पांच तक के छात्रों के लिए नैतिक मूल्यों पर आधारित पाठ्यक्रम विकसित करने के वास्ते लगभग डेढ़ साल तक काम किया है, जिसे मौजूदा शैक्षणिक सत्र से लागू कर दिया गया है।
धर्मशाला स्थित ‘लाइब्रेरी ऑफ तिब्बती वर्क्स एंड आर्काइव्स’ (एलटीडब्ल्यूए) के निदेशक एवं मुख्य वक्ता गेशे ल्हाकडोर द्वारा दिए गए संदेश का हवाला देते हुए सोना ने कहा कि करुणा की भावना केवल साथी मनुष्यों तक ही सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसका विस्तार पर्यावरण और जीवन के सभी रूपों तक होना चाहिए।
भाषा
प्रचेता पारुल
पारुल