असम : कांग्रेस ने काजीरंगा ईएसजेड का दायरा कम करने के प्रस्ताव का विरोध किया

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असम : कांग्रेस ने काजीरंगा ईएसजेड का दायरा कम करने के प्रस्ताव का विरोध किया

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  • Publish Date - August 17, 2026 / 09:28 PM IST,
    Updated On - August 17, 2026 / 09:28 PM IST

गुवाहाटी, 17 अगस्त (भाषा) कांग्रेस की असम इकाई ने काजीरंगा राष्ट्रीय अभयारण्य के आसपास स्थापित पारिस्थितिकी संवेदनशील जोन (ईएसजेड) का दायरा घटाने के कथित प्रस्ताव के खिलाफ सोमवार को राज्य सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।

राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी ने आरोप लगाया कि यह कदम बड़ी कंपनियों द्वारा खनन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया गया है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं लोकसभा में विपक्ष के उप-नेता गौरव गोगोई के नेतृत्व में कांग्रेस के कई कार्यकर्ता कोहोरा रेंज में जमा हुए और काजीरंगा के संरक्षण और प्रस्ताव को वापस लेने की मांग करते हुए नारेबाजी की।

गोगोई ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि ईएसजेड के दायरे को कम करना अदाणी और अंबानी समूह समेत बड़े उद्योग घरानों के लाभ पहुंचाने और पड़ोसी कार्बी आंगलोंग पहाड़ियों में बड़े पैमाने पर वाणिज्यिक खनन को आसान बनाने की एक ‘गहरी साजिश’ का हिस्सा था।

गोगोई ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेताओं, मंत्रियों और विधायकों पर आरोप लगाया कि उन्होंने रिसॉर्ट बनाने के लिए हाथी गलियारे पर कब्जा किया और एंगले पाथर में होटल बनाने के लिए आदिवासी परिवारों को जमीन से जबरन बेदखल कर दिया।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा, ‘‘सरकार के संरक्षण में बड़े पैमाने पर हो रही कोयले, पत्थर और रेत की अवैध खनन की वजह से ऊपरी असम में भयानक बाढ़ आई है, जिसमें 4,000 से अधिक घर बर्बाद हो गए हैं और 100 से ज़्यादा लोगों की जान चली गई है।’’

उन्होंने कहा कि बेरोकटोक हो रही पेड़ों की कटाई और पहाड़ियों में खनन ने बाघों और हाथियों को इंसानी बस्तियों की ओर आने पर मजबूर कर दिया है, जिससे इंसान और वन्यजीवों के बीच टकराव बढ़ गया है।

गोगोई ने मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सरकार ‘खनन माफिया’ के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के बजाय उन्हें कानूनी सुरक्षा दे रही है।

उन्होंने कार्यकर्ता प्रणब डोले की तुरंत रिहाई की मांग की, जिन्हें काजीरंगा राष्ट्रीय अभयारण्य के पास पंच सितारा होटल बनाने के लिए जबरन जमीन लेने की सरकार की ‘जन-विरोधी और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली नीतियों’ का विरोध करने पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत गिरफ्तार किया गया था।

ईएसजेड या जंगल के बफर ज़ोन में वाणिज्यिक गतिविधियां तय नियमों के अनुसार या तो प्रतिबंधित होती हैं, नियंत्रित होती हैं या फिर विनियमित तरीके से अंजाम देने अनुमति होती है।

काजीरंगा राष्ट्रीय अभयारण्य के ईएसजेड को लेकर विवाद असम सरकार के उस प्रस्ताव से शुरू हुआ है, जिसमें इस विश्व विरासत स्थलके आसपास के बफर जोन को 10 किलोमीटर से घटाकर एक किलोमीटर करने की बात कही गई है।

दूसरी ओर, मुख्यमंत्री शर्मा ने बफर जोन का दायरा कम करने के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि इस फैसले से ईएसजेड के अंदर रहने वाले ग्रामीणों की सुरक्षा और उनकी आजीविका को बचाने में मदद मिलेगी।

भाषा धीरज सुरेश

सुरेश