असम: निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ने की धमकी देने वाले नेताओं को मनाने में जुटे हिमंत, दिलीप सैकिया

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असम: निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ने की धमकी देने वाले नेताओं को मनाने में जुटे हिमंत, दिलीप सैकिया

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  • Publish Date - March 22, 2026 / 03:46 PM IST,
    Updated On - March 22, 2026 / 03:46 PM IST

गुवाहाटी, 22 मार्च (भाषा) असम में नौ अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव के वास्ते भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से टिकट न मिलने पर कई निवर्तमान विधायकों और अन्य नेताओं ने निर्दलीय के तौर पर चुनाव लड़ने की धमकी दी है, जिसके बाद मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा और प्रदेश पार्टी प्रमुख दिलीप सैकिया उन्हें मनाने में जुटे हुए हैं। पार्टी सूत्रों ने यह जानकारी दी।

कांग्रेस नेताओं– प्रद्युत बोरदोलोई और भूपेन बोरा के हाल में भाजपा में शामिल होने और उसके बाद उन्हें क्रमशः दिसपुर तथा बिहपुरिया विधानसभा सीट से पार्टी प्रत्याशी बनाए जाने से पार्टी का टिकट पाने के इच्छुक कई नेता नाराज हो गए हैं।

सबसे मुखर विरोध दिसपुर निर्वाचन क्षेत्र में हुआ है, जहां वरिष्ठ पार्टी नेता जयंत दास के उम्मीदवार बनने की प्रबल संभावना थी, लेकिन बोरदोलोई के पाला बदलने एवं उन्हें प्रत्याशी घोषित किए जाने से स्थिति बिल्कुल बदल गई है।

दास ने शर्मा के खिलाफ खुलकर विद्रोह कर दिया है और उन पर आरोप लगाया कि उन्होंने कांग्रेस से अपने करीबी सहयोगियों को लाकर एवं भाजपा के पुराने नेताओं की अनदेखी करके पार्टी को ‘‘कांग्रेस भाजपा’’ बना दिया है।

उन्होंने भाजपा छोड़ दी है और संभवतः दिसपुर निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ेंगे। उनका दावा है कि उनके समर्थकों ने नामांकन पत्र एकत्र कर लिए हैं।

भाजपा ने मौजूदा विधायक और वरिष्ठ नेता अतुल बोरा को भी टिकट नहीं दिया है। वह 2016 से दो बार निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा विधायक रह चुके हैं। वह 1985 से दो बार अगप नेता के तौर पर भी विधानसभा पहुंच चुके हैं।

अतुल बोरा ने भी घोषणा की कि वह निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने पर विचार कर रहे हैं, लेकिन मुख्यमंत्री ने उन्हें मनाने के लिए उनके आवास पर मुलाकात की। हालांकि वरिष्ठ नेता ने अपनी योजना के बारे में कुछ भी खुलासा नहीं किया।

दो अन्य निर्वाचन क्षेत्रों – नए गुवाहाटी और गुवाहाटी मध्य – में भी असंतोष चरम पर है, जहां भाजपा के वरिष्ठ नेता सिद्धार्थ भट्टाचार्य और अगप के रामेंद्र नारायण कलिता (दोनों पूर्व मंत्रियों) को टिकट नहीं दिया गया है।

भट्टाचार्य ने ही 2015 में शर्मा को भाजपा में लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने कहा कि वह पार्टी से नाराज नहीं हैं, लेकिन वह चुनाव में अपनी भागीदारी के बारे में कुछ कह भी नहीं रहे हैं।

कलिता टिकट नहीं मिलने से नाराज हैं। मुख्यमंत्री उन्हें मनाने के लिए उनके आवास पर भी पहुंचे।

भट्टाचार्य की जगह समागुरी के मौजूदा विधायक दीप्लू रंजन शर्मा को उम्मीदवार बनाया गया है, जो वरिष्ठ नेता का आशीर्वाद लेने के लिए उनके घर पहुंचे।

कलिता की जगह भाजपा के वरिष्ठ नेता विजय गुप्ता को प्रत्याशी बनाए जाने से भी निर्वाचन क्षेत्र के कुछ मतदाताओं में नाराजगी है, क्योंकि पहली बार किसी हिंदी भाषी को इस सीट से उम्मीदवार बनाया गया है।

बिहपुरिया निर्वाचन क्षेत्र में भी आक्रोश चरम पर है, जहां भूपेन बोरा को मौजूदा भाजपा विधायक अमिया कुमार भुइंया की जगह प्रत्याशी बनाया गया है।

ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (एएएसयू) के पूर्व नेता भुइंया ने कहा कि वह निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने पर विचार कर रहे हैं और इस मामले पर अपने समर्थकों के साथ चर्चा कर रहे हैं।

जोरहाट के पूर्व सांसद तपन कुमार गोगोई सोनारी विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने की योजना बना रहे हैं, जहां से उन्होंने 2016 में जीत हासिल की थी। वह 2024 के संसदीय चुनाव में जोरहाट सीट से गौरव गोगोई से हार गए थे।

उन्होंने कहा कि उनके समर्थक चाहते हैं कि वह निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ें और ‘‘हम इस मुद्दे पर चर्चा कर रहे हैं।’’

भाषा राजकुमार नेत्रपाल

नेत्रपाल