नयी दिल्ली, पांच अप्रैल (भाषा) कांग्रेस ने रविवार को लोकसभा सीट की संख्या बढ़ाने के प्रस्ताव को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर तीखा हमला करते हुए कहा कि वह इस कदम को जबरदस्ती थोप रहे हैं जिससे बड़े और अधिक आबादी वाले राज्यों को अधिक लाभ होगा और यह ‘‘जनता का ध्यान भटकाने का हथियार’’ मात्र है।
विपक्षी दल ने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री देश की जनता को ‘‘गुमराह’’ कर रहे हैं और भ्रामक बयान दे रहे हैं जिनका उद्देश्य धोखा देना है।
सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री हमेशा की तरह भ्रामक बयान देकर धोखा देने की कोशिश कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर लोकसभा की सीट की संख्या 50 प्रतिशत बढ़ा दी जाए और प्रत्येक राज्य की सीट की संख्या भी 50 प्रतिशत बढ़ा दी जाए तो दक्षिण भारतीय राज्यों को कोई नुकसान नहीं होगा।’’
रमेश ने कहा, ‘‘यह देश की जनता को धोखा देने का प्रयास है, जिसमें प्रधानमंत्री को अद्वितीय विशेषज्ञता प्राप्त है।’’
उन्होंने कहा कि उदाहरण के लिए लोकसभा में उत्तर प्रदेश और केरल की सीट के बीच का अंतर वर्तमान में 60 है और मोदी के प्रस्ताव से यह अंतर बढ़कर 90 हो जाएगा।
रमेश ने कहा कि इसी तरह, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु के बीच का अंतर 41 से बढ़कर कम से कम 61 हो जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसे और उदाहरणों को जोड़ा जा सकता है।
कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘मोदी एक ऐसे प्रस्ताव को जबरदस्ती थोप रहे हैं जिससे बड़े और अधिक आबादी वाले राज्यों को अधिक लाभ होगा।’’
उन्होंने तर्क दिया कि केवल दक्षिण भारत ही नहीं, बल्कि पंजाब और हरियाणा जैसे राज्य और पूर्वोत्तर के राज्यों का भी सापेक्षिक प्रभाव कम हो जाएगा।
रमेश ने कहा, ‘‘देश गंभीर आर्थिक और विदेश नीति संकट का सामना कर रहा है। प्रधानमंत्री को सिर्फ लोकसभा और विधानसभाओं की संख्या बढ़ाने की चिंता है, वो भी बिना किसी सार्थक परामर्श और व्यापक जन बहस के। यह जनता का ध्यान भटकाने का एक हथियार मात्र है।’’
रमेश के पोस्ट को टैग करते हुए कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि जयराम रमेश की भविष्यवाणी बिल्कुल सटीक है और प्रधानमंत्री मोदी की बयानबाजी पूरी तरह से गलत है।
तिवारी ने कहा, ‘‘इस बात पर ध्यान केंद्रित करना होगा कि हिंदी भाषी राज्यों की तुलना में दक्षिण भारत, पश्चिम भारत, पूर्वोत्तर भारत और उत्तर पश्चिमी भारत को राजनीतिक प्रभाव के मामले में खासकर संसदीय सीट की संख्या में अंतर के संदर्भ में कितना नुकसान होगा।’’
चंडीगढ़ के सांसद ने बताया कि पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर और दिल्ली जैसे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पास लोकसभा में कुल मिलाकर सिर्फ 40 सीट हैं जबकि उत्तर प्रदेश के पास 80 सीट हैं। उन्होंने कहा, ‘‘परिसीमन के बाद यह अंतर और भी बढ़ जाएगा।’’
तिवारी ने अपने पोस्ट में कहा, ‘‘प्रधानमंत्री कार्यालय और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर से जो भी प्रस्ताव अभी स्पष्ट नहीं है, उससे संघीय संतुलन और बिगड़ जाएगा और हिंदी भाषी राज्यों के अलावा अन्य राज्यों को नुकसान होगा।’’
उनकी यह टिप्पणी प्रधानमंत्री मोदी के उस बयान के एक दिन बाद आई है जिसमें उन्होंने कहा था कि संसद का बजट सत्र तीन दिनों के लिए बढ़ा दिया गया है ताकि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने के लिए 2023 में पारित कानून को 2029 से लागू किया जा सके।
बृहस्पतिवार को संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने राज्यसभा में कहा था कि सदन जल्द एक महत्वपूर्ण विधेयक पर विचार करने के लिए फिर से बैठक करेगा।
उन्होंने कहा, ‘‘हमारे पास कुछ विधेयक और महत्वपूर्ण मुद्दे हैं और हमने इन्हें विपक्ष के साथ भी साझा किया है। अगले दो-तीन हफ्तों में हम एक बहुत ही महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने जा रहे हैं।’’
बाद में यह पता चला कि संसद का बजट सत्र 16 अप्रैल को कुछ समय के अवकाश के बाद फिर से शुरू होगा ताकि लोकसभा सीट की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 करने वाले विधेयकों को पारित किया जा सके और महिला आरक्षण कानून को जल्द से जल्द लागू किया जा सके।
केरल में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की चुनावी रैली को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि 16 से 18 अप्रैल को होने वाले संसद सत्र के दौरान सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, गोवा या तेलंगाना किसी भी राज्य में लोकसभा सीट में कमी नहीं हो।
प्रधानमंत्री ने कहा कि राजग सरकार ने 2023 में एक कानून के माध्यम से लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया है।
मोदी ने कहा, ‘‘क्या आप जानते हैं कि संसद का सत्र फिर से क्यों शुरू होगा? हमने महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का कानून पारित किया है, ताकि इसका लाभ 2029 के लोकसभा चुनाव से शुरू हो सके और हमारी 33 प्रतिशत बहनें संसद में बैठ सकें। इसके लिए और अधिक कानूनी प्रावधानों की आवश्यकता है।’’
महिला आरक्षण अधिनियम संसद द्वारा 2023 में पारित किया गया था। लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने का प्रावधान संविधान में संशोधन करके लाया गया था लेकिन यह परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही प्रभावी होगा।
भाषा सुरभि गोला
गोला