बदायूं (उप्र), चार अप्रैल (भाषा) जिले में एक किसान 14.66 करोड़ रुपये का कर नोटिस मिलने से स्तब्ध रह गया। यह नोटिस कथित तौर पर दिल्ली में उसके नाम का उपयोग करके संचालित की जा रही एक फर्जी फर्म की वजह से मिला।
बदायूं के जिलाधिकारी अवनीश राय ने शनिवार को कहा, ‘‘किसान द्वारा औपचारिक आवेदन दिए जाने के बाद, मामले की जांच के लिए अपर जिलाधिकारी (वित्त) और उपायुक्त (जीएसटी) सहित दो सदस्यीय टीम का गठन किया गया है।’’
किसान भोला सिंह ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि मामले के बारे में विभागीय अधिकारियों से पूछताछ करने पर जानकारी मिली कि दिल्ली के नारायणा औद्योगिक क्षेत्र (फेज-1) में उनके नाम से राम स्टोर नाम की फर्म संचालित की जा रही है, जिस पर 1.02 करोड़ रुपये का आयकर बकाया है।
उन्होंने कहा कि इस बीच, जीएसटी कार्यालय ने भी उन्हें 13.63 करोड़ रुपये की वस्तु एवं सेवा कर देनदारी का हवाला देते हुए एक नोटिस जारी किया।
वजीरगंज क्षेत्र के खुर्रमपुर भमोरी निवासी सिंह ने कहा कि 29 मार्च को उन्हें बदायूँ में आयकर विभाग से एक नोटिस मिला, जिसमें उन्हें 1.02 करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश दिया गया।
सिंह ने दावा किया कि वह कभी दिल्ली नहीं गए, और न ही उन्होंने कभी कोई फर्म या व्यावसायिक उद्यम स्थापित किया।
उन्होंने कहा कि नोटिस मिलने के बाद उन्होंने बदायूं के जिलाधिकारी से औपचारिक शिकायत की।
मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को जांच कर समस्या का समाधान करने का निर्देश जारी किया।
प्रारंभिक जांच के दौरान, जीएसटी अधिकारियों ने पाया कि जिस फर्म पर यह कर बकाया है, उसने किसान के आधार और पैन नंबर का इस्तेमाल किया।
अधिकारियों ने कहा, इससे यह स्पष्ट है कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने फर्जी फर्म स्थापित करने के लिए सिंह के दस्तावेजों का दुरुपयोग किया और करोड़ों रुपये का लेनदेन किया।
सिंह ने बताया कि अधिकारियों ने उन्हें साइबर थाने या नजदीकी थाने में शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी।
उन्होंने दावा किया कि जब वह वजीरगंज थाने और साइबर थाने पहुंचे तो उनकी रिपोर्ट वहां दर्ज नहीं की गई, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ गई।
बदायूं के जिलाधिकारी अवनीश राय ने शनिवार को कहा कि एक किसान को आयकर और जीएसटी विभाग से एक नोटिस मिला है जिसमें उससे कर का भुगतान करने को कहा गया है।
जिलाधिकारी ने कहा, “किसान ने औपचारिक लिखित आवेदन देकर अधिकारियों को नोटिस से अवगत कराया है। मामले की जांच के लिए अपर जिलाधिकारी (वित्त) और उपायुक्त (जीएसटी) सहित दो सदस्यीय टीम का गठन किया गया है।’’
उन्होंने कहा कि प्रतीत होता है कि मामला धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़ा है।
जिलाधिकारी ने कहा कि टीम मामले की गहन जांच करेगी और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी।
सिंह ने यह भी कहा कि अगर वह अपनी सारी जमीन और संपत्ति बेच दें तो भी वह इतनी बड़ी रकम चुकाने में असमर्थ है। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और उन्हें न्याय दिलाया जाए।
जिलाधिकारी राय ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘जांच की रिपोर्ट तीन-चार दिन के भीतर आने की उम्मीद है, जिसके बाद धोखाधड़ी में शामिल व्यक्ति या फर्म के खिलाफ कार्रवाई शुरू की जाएगी और उनसे बकाया आयकर तथा जीएसटी बकाया की वसूली की जाएगी।’’
भाषा सं जफर
पवनेश नेत्रपाल
नेत्रपाल