कड़ी सुरक्षा के बीच पुरी में बहुड़ा यात्रा शुरू, लाखों लोगों ने भगवान जगन्नाथ की शोभायात्रा देखी
कड़ी सुरक्षा के बीच पुरी में बहुड़ा यात्रा शुरू, लाखों लोगों ने भगवान जगन्नाथ की शोभायात्रा देखी
पुरी, 24 जुलाई (भाषा) ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की वापसी की रथयात्रा ‘बहुड़ा यात्रा’ शुक्रवार को भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शुरू हो गई और इस यात्रा में शामिल होने के लिए लाखों श्रद्धालु पुरी में उमड़ पड़े।
‘बहुड़ा यात्रा’ इस वार्षिक रथयात्रा का दूसरा चरण है जिसमें भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा गुंडिचा मंदिर से 12वीं सदी के जगन्नाथ मंदिर लौटते हैं। गुंडिचा मंदिर यहां से लगभग 2.6 किलोमीटर दूर है।
अनुष्ठानों की शुरुआत सेवादारों द्वारा पारंपरिक ‘गोटी पहंडी’ (एक कतार में शोभायात्रा) के जरिए भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा को मंदिर के बाहर खड़े रथों तक ले जाने के साथ हुई।
‘पहंडी’ की प्रक्रिया अपराह्न के समय शुरू होनी थी लेकिन यह सुबह 10 बजकर 50 मिनट पर शुरू हो गई। ‘‘जय जगन्नाथ’’ और ‘‘हरिबोल’’ के जयघोष के बीच भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा को एक-एक करके उनके संबंधित रथों में विराजमान कराया गया।
तीनों रथ – भगवान बलभद्र का ‘तालध्वज’, देवी सुभद्रा का ‘दर्पदलन’ और भगवान जगन्नाथ के ‘नंदीघोष’ को बाद में श्रद्धालु जगन्नाथ मंदिर तक खींचकर ले जाएंगे।
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, विपक्ष के नेता नवीन पटनायक और कई अन्य नेताओं ने इस मौके पर श्रद्धालुओं का अभिवादन किया।
माझी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, ‘‘पवित्र बहुड़ा यात्रा के अवसर पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं। भगवान जगन्नाथ, माता सुभद्रा और भगवान बलभद्र की असीम कृपा सभी के जीवन को खुशी, शांति, समृद्धि और आनंद से भर दे।’’
भगवान जगन्नाथ के दिव्य चक्र ‘चक्रराज सुदर्शन’ को सबसे पहले श्री गुंडिचा मंदिर से बाहर लाया गया और देवी सुभद्रा के ‘दर्पदलन’ रथ पर रखा गया।
इसके बाद भगवान बलभद्र को लाया गया, जबकि देवी सुभद्रा को विशेष ‘शून्य पहंडी’ शोभायात्रा में उनके रथ तक ले जाया गया। इस शोभायात्रा में सेवादारों द्वारा ले जाते समय देवी का मुख आकाश की ओर होता है।
शोभायात्रा के अंत में भगवान जगन्नाथ को उनके ‘नंदीघोष’ रथ तक ले जाया जाता है।
श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के कार्यक्रम के अनुसार, पुरी के गजपति महाराजा दिब्यसिंह देब अपराह्न ढाई बजे से अपराह्न साढ़े तीन बजे के बीच ‘छेरा पहनरा’ (रथों की सफाई) की विधि करेंगे जिसके बाद श्रद्धालु शाम चार बजे रथ खींचना शुरू करेंगे।
उत्सव का आयोजन कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच किया जा रहा है क्योंकि पिछली रथ यात्रा के दौरान भीड़ बढ़ने से दो लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हो गए थे।
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजी) सौमेंद्र प्रियदर्शी ने कहा, ‘‘उत्सव के लिए हमने बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था की है क्योंकि श्रद्धालुओं की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ रही है। हमारी सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था 16 जुलाई को आयोजित रथयात्रा के दौरान किए गए बंदोबस्त के समान ही रहेगी।’’
केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) के जवानों सहित 13,000 से अधिक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती के अलावा समूचे शहर में निगरानी और भीड़ प्रबंधन के लिए 400 से अधिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।
पुलिस महानिदेशक वाई.बी. खुरानिया ने कहा, ‘‘हम यह सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव कोशिश कर रहे हैं कि उत्सव शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो।’’
इस बीच, भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने पुरी में बादल छाए रहने का अनुमान जताया है। साथ ही, आर्द्रता 80 से 90 प्रतिशत के बीच रहने तथा तापमान 29 से 30 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है।
भाषा सुरभि नेत्रपाल
नेत्रपाल

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