बंगाल-ओडिशा गलियारा ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ को आगे बढ़ाने में निभा सकता है अहम भूमिका: जी किशन रेड्डी
बंगाल-ओडिशा गलियारा ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ को आगे बढ़ाने में निभा सकता है अहम भूमिका: जी किशन रेड्डी
(फोटो के साथ)
कोलकाता, 28 सितंबर (भाषा) पश्चिम बंगाल में एल्युमीनियम-आधारित ‘डाउनस्ट्रीम उद्योगों’ के वृहद विकास पर जोर देते हुए केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने सोमवार को कहा कि बंगाल-ओडिशा औद्योगिकी गलियारा भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है।
रेड्डी ने यहां एक रोडशो को संबोधित करते हुए कहा कि अपनी भौगोलिक स्थिति और औद्योगिक विरासत को देखते हुए पश्चिम बंगाल को ‘एल्युमीनियम डाउनस्ट्रीम इकोसिस्टम’ विकसित करने और रोजगार पैदा करने में एक स्वाभाविक भागीदार के रूप में उभरना चाहिए।
केंद्रीय कोयला और खान मंत्री ने कहा, ‘‘बंगाल-ओडिशा गलियारा ‘एक्ट ईस्ट’ मिशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।’’
एल्युमीनियम-आधारित ‘डाउनस्ट्रीम उद्योगों का मतलब है एल्युमिनियम से आगे के उत्पाद बनाने वाले उद्योग।
रेड्डी ने कहा कि पश्चिम बंगाल की औद्योगिक अहमियत को बहाल करने का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार राज्य में बुनियादी ढांचे के विकास, निवेश और रोजगार सृजन में मदद करने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा, ‘‘पश्चिम बंगाल कभी भारत का प्रमुख औद्योगिक केंद्र हुआ करता था। अब उस गौरव को वापस लाने का समय आ गया है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘बंगाल की ऐतिहासिक विरासत का सम्मान करते हुए (प्रधानमंत्री नरेन्द्र) मोदी ने मंत्रिमंडल की बैठकों में सभी मंत्रियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि राज्य के लिए जो भी जरूरी हो — चाहे वह बुनियादी ढांचे का विकास हो, निवेश हो या रोजगार पैदा करना हो — उस पर सक्रिय रूप से काम किया जाए।’’
कोयला मंत्री ने बताया कि राज्य में बुनियादी ढांचे से जुड़े कामों पर पहले ही 79,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा खर्च किए जा चुके हैं तथा 1.47 लाख करोड़ रुपये की लागत वाली परियोजनाएं विचाराधीन हैं।
उन्होंने ‘इंटीग्रेटेड मैरीटाइम कॉरिडोर’, बंदरगाहों पर आधुनिक ‘ऑटोमेटेड बर्थ’ और नदी के नीचे चलने वाली मेट्रो जैसी परियोजनाओं का उल्लेख किया, जिनसे कनेक्टिविटी बेहतर हो सकती है और उद्योगों की बाज़ारों तक पहुंच आसान हो सकती है।
भाषा
राजकुमार नरेश
नरेश

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