बंगाल: प्रधानमंत्री मोदी की सिंगूर में रैली, भाजपा ‘लुप्त उद्योग’ के मुद्दे को धार देने में जुटी

बंगाल: प्रधानमंत्री मोदी की सिंगूर में रैली, भाजपा ‘लुप्त उद्योग’ के मुद्दे को धार देने में जुटी

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  • Publish Date - January 15, 2026 / 04:41 PM IST,
    Updated On - January 15, 2026 / 04:41 PM IST

(सौगत मुखोपाध्याय)

कोलकाता, 15 जनवरी (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पश्चिम बंगाल में औद्योगीकरण के अपने मुद्दे को धार देती हुई प्रतीत हो रही है। इसी कड़ी में पार्टी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की 18 जनवरी को सिंगूर में रैली आयोजित कर रही है, जहां कभी टाटा नैनो का कारखाना हुआ करता था। इसका (रैली का) मकसद विधानसभा चुनावों से पहले, राज्य में आर्थिक अवसरों की अनदेखी के मुद्दे को फिर से जोर-शोर से उठाना है

तृणमूल कांग्रेस को टक्कर देने के लिए अपने चुनावी अभियान को पूरी रफ्तार से आगे बढ़ाने की तैयारी में जुटे भाजपा नेताओं को उम्मीद है कि हुगली जिले के सिंगूर में मोदी का संबोधन बंगाल में बड़े निवेश आकर्षित करने की राह को लेकर एक व्यापक दृष्टि पेश करेगा। पार्टी इस धारणा को आधार बना रही है कि छोटी कार परियोजना के हटने के बाद से राज्य उद्योगों के अभाव से जूझता रहा है।

विधानसभा चुनाव से महज कुछ महीने पहले प्रधानमंत्री की रैली के लिए पार्टी द्वारा चुना गया स्थान स्पष्ट रूप से प्रतीकात्मक है और तृणमूल सरकार के व्यापार को आकर्षित करने में विफल रहने की आलोचना करने व सत्ता में आने पर बंगाल में उद्योग को पुनर्जीवित करने के अपने वैकल्पिक दृष्टिकोण को साझा करने के लिए पार्टी के संदेश के लिए उपयुक्त है।

भाजपा की राज्य इकाई के अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, “सिंगूर के नैनो संयंत्र वाली जगह पर कोई कृषि गतिविधि नहीं हो सकती क्योंकि भूमि का स्वरूप कृषि से औद्योगिक में बदल दिया गया है। बंगाल में, हमें भारी उद्योगों को आकर्षित करने के लिए एक व्यापक भूमि नीति की आवश्यकता है, जो स्थानीय प्रतिभा को बनाए रखने और पलायन व कार्यबल को दूसरे राज्यों में जाने से रोकने का एकमात्र तरीका है।”

उन्होंने बताया कि इस नीति में किसानों को उद्योगों में प्रत्यक्ष हितधारक बनाया जाना शामिल होना चाहिए, जिसके लिए उन्हें आवश्यकता पड़ने पर अपनी भूमि छोड़नी पड़ सकती है।

भट्टाचार्य ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा प्रचारित “कृषि-उद्योग सह-अस्तित्व सिद्धांत” को खारिज करते हुए कहा कि बड़े उद्योग केवल कृषि भूमि पर ही स्थापित किए जा सकते हैं, क्योंकि राज्य की 82 प्रतिशत भूमि छोटे किसानों के पास है।

उन्होंने कहा, “बंगाल को नदियों, समुद्र और अपने पड़ोस में दो अत्यंत खनिज-समृद्ध राज्यों की अनूठी भौगोलिक स्थिति का लाभ प्राप्त है। अगर हम राज्य के अधीनस्थ न्यायालयों को मुकदमेबाजी के दौरान व्यावसायिक घरानों के पक्ष में निष्पक्ष निर्णय देने के लिए राजनीतिक दबाव से मुक्त कर सकें, तो निवेशकों को आसानी से यहां आकर्षित किया जा सकता है।”

बुद्धदेव भट्टाचार्य के नेतृत्व वाली वाम मोर्चा सरकार द्वारा उपजाऊ कृषि भूमि के जबरन अधिग्रहण के खिलाफ तत्कालीन विपक्षी दल तृणमूल द्वारा किसानों के साथ मिलकर किये गये विरोध प्रदर्शन हिंसा, आगजनी और झड़पों में तब्दील हो गए, जिसकी वजह से टाटा मोटर्स को 2008 में सिंगूर परियोजना को बंद करने और इसे गुजरात में स्थानांतरित करने के लिए मजबूर होना पड़ा था।

उस समय मोदी गुजरात में मुख्यमंत्री थे।

भाजपा विधायक और अर्थशास्त्री अशोक लाहिड़ी ने इस बात पर जोर दिया कि सिंगूर में बंद पड़े कारखाने की जमीन को केवल नए औद्योगीकरण से ही बचाया जा सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि उद्योग में भूस्वामियों को हिस्सेदारी देना ‘मामलों को जटिल बना सकता है’।

तृणमूल ने 25 वर्षों से अधिक समय तक सिंगूर के राजनीतिक मानचित्र पर अपना दबदबा बनाए रखा और 2001 से लगातार राज्य चुनावों में जीत दर्ज की। पार्टी ने हालांकि सिंगूर पर दोबारा ध्यान केंद्रित किए जाने को नकार दिया।

राज्य सरकार में मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने हाल ही में कहा था, “उच्चतम न्यायालय ने कहा कि सिंगूर में भूमि अधिग्रहण गलत था। जब किसानों को पीटा जा रहा था और जबरन जमीनें छीनी जा रही थीं, तब ये नेता कहां थे?”

वर्ष 2021 में सिंगूर सीट से चुनाव हारने वाले मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के युवा नेता सृजन भट्टाचार्य ने कहा कि बंगाल के खंडित भूभागों की कृषि उत्पादन क्षमता अब अपनी सीमा पर पहुंच चुकी है और भूमि अधिग्रहण का एकमात्र उपाय जमीन मालिकों को अधिग्रहण प्रक्रिया में भागीदार बनाना है।

भट्टाचार्य ने चुनाव से पहले उद्योग जगत के मुद्दे को उठाने के लिए भाजपा की ‘विश्वसनीयता’ पर सवाल उठाया क्योंकि पार्टी ने वर्षों पहले बनर्जी के कारखाना विरोधी आंदोलन का समर्थन किया था।

राज्य के उद्योग जगत के कुछ जानकारों का कहना है कि सिंगूर की घटना निवेश में अनिच्छा का एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है लेकिन इस मामले में अंतिम निर्णायक कदम मार्च 2025 में उठाया गया, जब तृणमूल सरकार ने कल्याणकारी योजनाओं के लिए धन की कमी का हवाला देते हुए 1993 से किए गए औद्योगिक प्रोत्साहनों को रद्द करने वाला कानून पारित किया।

भाषा जितेंद्र पवनेश

पवनेश