बंगाल एसआईआर: न्यायालय ने निर्वाचन आयोग से न्यायाधिकरणों में लंबित अपील का आंकड़ा मांगा

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बंगाल एसआईआर: न्यायालय ने निर्वाचन आयोग से न्यायाधिकरणों में लंबित अपील का आंकड़ा मांगा

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  • Publish Date - August 25, 2026 / 04:05 PM IST,
    Updated On - August 25, 2026 / 04:05 PM IST

नयी दिल्ली, 25 अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को निर्वाचन आयोग को पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद मतदाता सूची से नाम हटाए जाने या नाम शामिल किए जाने को चुनौती देने वाली विभिन्न अपील पर न्यायाधिकरणों द्वारा निपटाए गए मामलों और लंबित मामलों का आंकड़ा पेश करने का निर्देश दिया।

न्यायालय ने कहा कि इन मामलों का समयबद्ध तरीके से निपटारा किया जाना जरूरी है।

प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने निर्वाचन आयोग से यह बताने को कहा कि लंबित अपील के निपटारे की प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं और कितने अतिरिक्त न्यायाधिकरणों की जरूरत है।

पीठ ने कहा, ‘‘निर्वाचन आयोग हलफनामा दाखिल करके बताए कि न्यायाधिकरणों के समक्ष कितनी अपील लंबित हैं। लंबित अपील को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जाए और यह भी बताया जाए कि कितनी अपील उन मतदाताओं की ओर से दायर की गई हैं, जिनके नाम मतदाता सूची से हटाए गए या शामिल किए गए तथा कितनी प्रति-अपील दायर की गई हैं।’’

इसने कहा कि निर्वाचन आयोग यह भी बताए कि कितने अतिरिक्त न्यायाधिकरण गठित करने की जरूरत है।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने कहा कि लोगों को यह जानकारी नहीं मिल रही है कि न्यायाधिकरणों के समक्ष कितनी अपील लंबित हैं या कितनी अपील का निपटारा हो चुका है, क्योंकि यह जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।

बनर्जी ने कहा कि नगर निकाय और पंचायत चुनाव होने वाले हैं। उन्होंने कहा, ‘‘जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं, वे मतदान नहीं कर पाएंगे। मैंने 31 विधानसभा सीट का आंकड़ा दिया है। कृपया उनसे रिपोर्ट मंगाई जाए कि कितनी अपील दायर की गई हैं और कितनी का निपटारा किया गया है।’’

उच्चतम न्यायालय ने कहा कि वह मामले को केवल 31 विधानसभा क्षेत्रों तक सीमित नहीं रखेगा।

पीठ ने कहा, ‘‘हमारी चिंता सभी क्षेत्रों को लेकर है। अपीलों का समयबद्ध तरीके से निपटारा किया जाना चाहिए। जरूरत पड़ी तो हम और न्यायाधिकरण गठित करेंगे।’’

याचिकाकर्ताओं के एक अन्य समूह की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने एक सांसद को दिए गए जवाब का हवाला देते हुए कहा कि उसमें दी गई जानकारी बेहद ‘‘चौंकाने वाली’’ है। उन्होंने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के अपीलीय न्यायाधिकरणों के समक्ष दायर बड़ी संख्या में अपील वास्तव में मतदाता सूची से बाहर किए गए मतदाताओं की ओर से नहीं हैं।

निर्वाचन आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता डी.एस. नायडू ने अदालत को बताया कि आयोग अपीलीय न्यायाधिकरणों के साथ समन्वय कर रहा है और अपील निपटारे की प्रक्रिया को सुचारू बनाने के तरीकों पर विचार कर रहा है।

उच्चतम न्यायालय एसआईआर के अपीलीय न्यायाधिकरणों के समक्ष लंबित अपीलों के निपटारे की प्रक्रिया को सुचारू और तेज करने के उपायों के अनुरोध वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था।

गत 24 अप्रैल को शीर्ष अदालत ने अपीलीय न्यायाधिकरणों को निर्देश दिया था कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर के बाद मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ तत्काल सुनवाई की जरूरत साबित करने वाले मामलों की प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई की जाए।

करीब 60 लाख दावों और आपत्तियों के निपटारे के लिए पश्चिम बंगाल एवं पड़ोसी राज्यों ओडिशा और झारखंड के करीब 700 न्यायिक अधिकारियों को तैनात किया गया था।

बाद में, शीर्ष अदालत के निर्देश पर कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने अपीलों पर फैसला करने के लिए 19 न्यायाधिकरण गठित किए। इन न्यायाधिकरणों की अध्यक्षता उच्च न्यायालयों के पूर्व मुख्य न्यायाधीशों और न्यायाधीशों को सौंपी गई है।

भाषा अमित नेत्रपाल

नेत्रपाल