बंगाल में मदरसों के लिए ‘वंदे मातरम्’ का गायन अनिवार्य करने के आदेश से राजनीतिक विवाद उत्पन्न

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बंगाल में मदरसों के लिए 'वंदे मातरम्' का गायन अनिवार्य करने के आदेश से राजनीतिक विवाद उत्पन्न

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  • Publish Date - May 21, 2026 / 09:27 PM IST,
    Updated On - May 21, 2026 / 09:27 PM IST

कोलकाता, 21 मई (भाषा) पश्चिम बंगाल सरकार ने सभी मदरसों में ‘वंदे मातरम्’ का गायन अनिवार्य कर दिया है, जिसके बाद बृहस्पतिवार को राजनीतिक घमासान शुरू हो गया और राज्य की बदलती शैक्षणिक व्यवस्था को लेकर बहस तेज हो गई।

राज्य प्रशासन ने इस फैसले को शैक्षणिक संस्थानों में प्रार्थना सभा की प्रक्रिया में एकरूपता लाने का प्रयास बताया है, जबकि विपक्षी दलों ने सत्तारूढ़ सरकार पर ‘‘मनमाना’’ एजेंडा थोपने का आरोप लगाया है, जो राज्य की बहुलतावादी सामाजिक संरचना को प्रभावित कर सकता है।

शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार ने राज्य के सभी मदरसों में प्रार्थना सभा के दौरान ‘वंदे मातरम्’ का गायन तत्काल प्रभाव से अनिवार्य कर दिया है। इस संबंध में एक आधिकारिक आदेश जारी किया गया है।

मदरसा शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि यह निर्देश सरकार के मॉडल मदरसों, सरकारी सहायता प्राप्त मदरसों, अनुमोदित शिशु शिक्षा केंद्रों, माध्यमिक शिक्षा केंद्रों तथा अल्पसंख्यक मामलों एवं मदरसा शिक्षा विभाग के तहत आने वाले मान्यता प्राप्त गैर-सहायता प्राप्त मदरसों पर भी लागू होगा।

अधिसूचना में कहा गया है, ‘‘कक्षाओं की शुरुआत से पहले प्रार्थना सभा के दौरान ‘वंदे मातरम्’ का गायन अनिवार्य किया जाता है।’’

विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यह निर्णय सभी संस्थानों में प्रार्थना सभा की प्रक्रियाओं में ‘‘एकरूपता’’ लाने के उद्देश्य से लिया गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘यह आदेश सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बाद जारी किया गया है और इसे तत्काल प्रभाव से लागू किया जाना है।’’

यह अधिसूचना सभी जिलाधिकारियों, जिला स्कूल निरीक्षकों, पश्चिम बंगाल मदरसा शिक्षा बोर्ड तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है।

गौरतलब है कि पिछले सप्ताह राज्य सरकार ने सभी सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में भी सुबह की प्रार्थना सभा में ‘वंदे मातरम्’ का गायन अनिवार्य करने का निर्देश दिया था।

इस कदम को लेकर निर्देश में कहा गया है कि प्रत्येक छात्र को विद्यालय में दिन की शुरुआत में राष्ट्रगीत के गायन में भाग लेना होगा और संस्थान प्रमुखों को इसका सख्ती से पालन कराने को कहा गया है।

शिक्षा निदेशक ने 13 मई को सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को भेजे एक पत्र में कहा, ‘‘कक्षाएं शुरू होने से पहले सुबह की प्रार्थना सभा के दौरान ‘वंदे मातरम्’ का गायन अनिवार्य किया जाना चाहिए, ताकि राज्य के सभी स्कूलों में सभी छात्र तत्काल प्रभाव से ‘वंदे मातरम्’ गाएं।’’

हालांकि, मदरसों से संबंधित इस आदेश पर विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। विपक्ष ने सरकार पर शिक्षा व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति पर ध्यान देने के बजाय प्रतीकात्मक मुद्दों पर जोर देने का आरोप लगाया।

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के वरिष्ठ नेता सुजन चक्रवर्ती ने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा क्षेत्र में ‘‘गिरावट’’ से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है।

चक्रवर्ती ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘तृणमूल कांग्रेस ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद कर दिया था। इस सरकार की प्राथमिक चिंता शिक्षा क्षेत्र का पुनर्निर्माण होना चाहिए। लेकिन प्रशासन इस बात में ज्यादा दिलचस्पी ले रहा है कि स्कूलों में प्रार्थना सभा में कौन-सा गीत गाया जाए। इससे उनकी मंशा लोगों को भड़काने की लगती है, न कि शिक्षा क्षेत्र में सुधार करने की।’’

प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रदीप भट्टाचार्य ने मदरसा शिक्षा निदेशालय के आदेश को ‘‘अनुचित’’ करार दिया।

भट्टाचार्य ने कहा कि वंदे मातरम् ऐतिहासिक रूप से विरोध और राजनीतिक लामबंदी से जुड़ा रहा है, इसलिए इसे मदरसों में अनिवार्य बनाना ‘‘उचित नहीं’’ है।

उन्होंने कहा, ‘‘हमने राजनीतिक रैलियों और आंदोलनों में वंदे मातरम् का इस्तेमाल किया है। मुझे लगता है कि इसे मदरसों में अनिवार्य बनाना गलत फैसला है। सरकार मदरसों के शिक्षकों से परामर्श कर सकती थी और उन्हें फैसला लेने की अनुमति दे सकती थी। यह एक मनमाना निर्णय है।’’

उन्होंने कहा कि इस कदम से समाज के कुछ वर्गों में नाराजगी पैदा हो सकती है और उन्होंने सरकार से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया।

कांग्रेस की बंगाल इकाई के अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर ‘‘भारत की बहुलतावादी भावना को कमजोर करने की कोशिश’’ करने का आरोप लगाया और कहा, ‘‘हम भाजपा से खतरे को लेकर लगातार चेतावनी देते रहे हैं।’’

उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के उस बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने बार-बार कहा है कि भाजपा देश की बहुलतावादी और बहुसांस्कृतिक परंपराओं को कमजोर करना चाहती है।

हालांकि, तृणमूल कांग्रेस नेता एवं पूर्व मंत्री सिद्दीकुल्ला चौधरी ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से परहेज किया।

यह विवाद केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान बढ़ाने के व्यापक प्रयास की पृष्ठभूमि में सामने आया है।

केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान से जुड़े प्रावधानों को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए जाने के बाद यह आदेश आया है, जिसमें ‘वंदे मातरम्’ के गायन में बाधा डालने को दंडनीय अपराध बनाने के लिए राष्ट्रीय सम्मानों का अपमान रोकथाम अधिनियम, 1971 में संशोधन का प्रस्ताव है।

भाषा

गोला नरेश

नरेश