मुरैना/भोपालः Mine Mafias in Madhya Pradesh बीतें दिनों सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बनी सेंट्रल एम्पॉवर्ड कमेटी (CEC) की टीम ने मुरैना के राजघाट पहुंचकर अवैध खनन का जायजा लिया। इस दौरान MP, राजस्थान और UP के अधिकारी भी मौजूद रहे। टीम ने नाव के जरिए करीब 20 किलोमीटर में उन दुर्गम इलाकों का निरीक्षण किया, जहां पहले रेत माफिया बेखौफ अवैध उत्खनन करते रहे हैं, लेकिन जैसे ही ये टीम वापस लौटी, वैसे ही अवैध खनन का कारोबार फिर से शुरू हो गया। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अवैध रेत खनन के खिलाफ तल्ख़ टिप्पणी की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकारों ने पर्यावरण की रक्षा करने के अपने दायित्व से मुंह मोड़ लिया है। सरकार छोटे लोगों को तो पकड़ लेती हैं लेकिन सिंडिकेट चलाने वालों पर कार्रवाई नहीं करती है।
Mine Mafias in Madhya Pradesh अवैध रेत खनन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद सूबे की सियासी तपिश बढ़ गई। कांग्रेस आरोप लगा रही है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों को जानबूझकर अनदेखा करती है तो बीजेपी ने कहा कि हमारी सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाती है। माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।
सियासी वार-पलटवार के इतर सच ये भी है कि-केवल ग्वालियर चंबल नहीं बल्कि एमपी के लगभग हर जिले में खनन माफियाओं का आतंक जारी है। जब भी प्रशासनिक अमला, वन विभाग और पुलिस टीम, माफियाओं को रोकते हैं तो माफिया इनकी पिटाई करते हैं, याकि मौत के घाट उतार देते हैं। ऐसे में सवाल ये कि क्या प्रशासन विफल है जिसके चलते सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ रहा है? सवाल ये कि क्या आने वाले दिनों में माफियाओं के खिलाफ एक्शन देखने को मिलेगा? सबसे बड़ा सवाल ये कि प्रशासन को कोर्ट की फटकार से अब डर क्यूँ नहीं लगता?