बेंगलुरु, 19 जनवरी (भाषा) कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी जी एस संगरेशी ने सोमवार को कहा कि वृहद बेंगलुरु प्राधिकरण (जीबीए) के अंतर्गत आने वाले पांच नगर निगमों के चुनाव 25 मई के बाद इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के बजाय मतपत्रों के माध्यम से होंगे।
संगरेशी ने यह भी कहा कि इस साल के अंत में प्रस्तावित जिला और तालुक पंचायत चुनाव भी मतपत्रों के माध्यम से ही कराए जाएंगे।
उन्होंने कहा, ‘‘10वीं, 11वीं और 12वीं कक्षा की परीक्षाएं समाप्त होने के बाद, 25 मई के बाद चुनाव होने की संभावना है।’’
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने यहां संवाददाताओं से कहा कि इस बार जीबीए चुनाव मतपत्रों के माध्यम से कराए जाएंगे।
संगरेशी ने कहा, “चुनाव कराने के दो सर्वोत्तम तरीके हैं। शुरुआत से ही मतपत्रों का इस्तेमाल होता रहा है, लेकिन पिछले 20-30 वर्षों से ईवीएम का उपयोग किया जा रहा है। मतपत्रों के इस्तेमाल पर न तो कानून और न ही उच्चतम न्यायालय की रोक है।”
कर्नाटक में कांग्रेस सरकार ने पिछले साल सितंबर में राज्य निर्वाचन आयोग (एसईसी) को यह सिफारिश करने का फैसला किया था कि राज्य में भविष्य में होने वाले सभी पंचायत और शहरी निकाय चुनाव ईवीएम के बजाय मतपत्रों के माध्यम से कराए जाएं। सरकार का दावा था कि ईवीएम के प्रति लोगों की विश्वसनीयता कम हो रही है।
राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि अमेरिका जैसे विकसित देश भी मतपत्रों का इस्तेमाल करते हैं और देश में भी विधानसभा व लोकसभा चुनावों को छोड़कर ग्राम पंचायत व सहकारी समितियों के अधिकांश चुनाव मतपत्रों से होते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि, पिछली बार 2015 में बेंगलुरु नगर निगम के चुनाव ईवीएम से हुए थे।’’
जब उनसे पूछा गया कि क्या मतपत्रों का उपयोग करने का निर्णय सरकार के दबाव में लिया गया है, तो उन्होंने कहा कि राज्य निर्वाचन आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक निकाय है, और चूंकि कानून में मतपत्रों या ईवीएम का उपयोग करके चुनाव कराने का प्रावधान है, इसलिए आयोग के पास निर्णय लेने का विवेक है।
संगरेशी ने कहा, “मतपत्रों का उपयोग करना एक विकल्प है। राज्य निर्वाचन आयोग ने वर्तमान परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, विचार-विमर्श और चिंतन के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि मतपत्रों का उपयोग उचित है। पिछले 20-30 वर्षों से (बेंगलुरु में) मतदान करने वाले अधिकांश लोगों ने मतपत्र नहीं देखे हैं क्योंकि लंबे समय से ईवीएम का उपयोग किया जा रहा है। मतपत्र एक सर्वोत्तम प्रक्रिया भी है, जिसकी विश्वभर में सराहना की जाती है।”
पिछले हफ्ते उच्चतम न्यायालय ने कर्नाटक सरकार और राज्य चुनाव आयोग को 30 जून तक बेंगलुरु के निकाय चुनाव कराने का निर्देश दिया था।
भाषा नोमान खारी
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