(फाइल फोटो के साथ)
ईटानगर, एक मई (भाषा) अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने शुक्रवार को राज्य को जलविद्युत उत्पादन में ‘भारत का पावरहाउस’ बताते हुए कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे के विकास ने पर्यटन, कृषि और बागवानी क्षेत्रों को विकसित करने में मदद की है।
उन्होंने नयी दिल्ली में अशोका विश्वविद्यालय के ‘इसाक सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी’ द्वारा आयोजित ‘आईसीपीपी ग्रोथ कॉन्फ्रेंस 2026’ में नीति निर्माताओं और शिक्षाविदों को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य में वर्तमान में लगभग 19,000 मेगावाट की संचयी क्षमता वाली जलविद्युत परियोजनाएं विकास के विभिन्न चरणों में हैं।
उन्होंने कहा कि दीर्घकालिक लक्ष्य के तहत 2047 तक 40,000 मेगावाट बिजली उत्पादन हासिल करना है, जो विकसित भारत की परिकल्पना में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
मुख्यमंत्री ने पर्यटन, कृषि और बागवानी क्षेत्रों में तीव्र वृद्धि की भी चर्चा की और इस प्रगति का श्रेय बेहतर कनेक्टिविटी एवं बुनियादी ढांचे को दिया।
उन्होंने कहा कि दूरदराज और सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुंच समेत सड़क नेटवर्क के विस्तार ने राज्य में आर्थिक विकास एवं पर्यटन के नए रास्ते खोल दिए हैं।
मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, खांडू ने अरुणाचल प्रदेश को देश के सबसे खूबसूरत और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्यों में से एक बताया, जो पूर्वोत्तर का सबसे बड़ा राज्य होने के साथ-साथ इस क्षेत्र का सबसे पूर्वी और सबसे उत्तरी राज्य भी है।
खांडू ने कहा कि पूर्वोत्तर को कभी उग्रवाद, अल्पविकास और अलगाव के नजरिए से देखा जाता था लेकिन वहां पिछले एक दशक में उल्लेखनीय रूप से परिवर्तन हुआ है।
उन्होंने इस क्षेत्र को भारत के विकास एजेंडे के केंद्र में लाने का श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व को दिया।
भाषा
राजकुमार नरेश
नरेश