महिला आरक्षण विधेयक पारित न होने पर विपक्ष पर भड़के भजनलाल शर्मा, बताया ‘महिला विरोधी’

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महिला आरक्षण विधेयक पारित न होने पर विपक्ष पर भड़के भजनलाल शर्मा, बताया ‘महिला विरोधी’

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  • Publish Date - April 19, 2026 / 07:51 PM IST,
    Updated On - April 19, 2026 / 07:51 PM IST

जयपुर, 19 अप्रैल (भाषा) राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने रविवार को कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाले प्रस्तावित संविधान संशोधन विधेयक, 2026 को पारित नहीं होने दिया।

यहां भाजपा कार्यालय में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में शर्मा ने कहा, “कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने एक बार फिर अपना महिला विरोधी चेहरा उजागर किया है। उनके पास महिला सशक्तीकरण का ऐतिहासिक अवसर था, लेकिन उन्होंने संकीर्ण राजनीतिक हितों को प्राथमिकता दी।”

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार महिलाओं को विधायी निकायों में अधिक प्रतिनिधित्व देने के उद्देश्य से संविधान संशोधन विधेयक-2026 के साथ परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेशों से संबंधित कानूनों में संशोधन लेकर आई थी।

शर्मा ने कहा, “यदि यह विधेयक पारित हो जाता तो 2029 के आम चुनावों से लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में माताओं-बहनों को 33 प्रतिशत आरक्षण मिल जाता।”

कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि आजादी के 70 वर्षों में सबसे लंबे समय तक शासन करने वाली पार्टी ने महिलाओं को उनका अधिकार देने के प्रति गंभीरता नहीं दिखाई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह विधेयक महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित हो सकता था, लेकिन विपक्ष के नकारात्मक रुख के कारण यह पारित नहीं हो सका।

उन्होंने कहा, “लोकसभा में जो हुआ उसने न केवल लोकतंत्र, बल्कि देश की आधी आबादी की आकांक्षाओं को भी आहत किया है।”

शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सभी दलों से दलगत राजनीति से ऊपर उठकर विधेयक का समर्थन करने की अपील की थी और सरकार ने विपक्ष के हर सवाल का जवाब दिया, लेकिन इसके बावजूद सहयोग नहीं मिला।

परिसीमन को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि विशेषकर दक्षिण भारत के संदर्भ में गलत जानकारी दी गई, जबकि इस प्रक्रिया से सभी राज्यों को उचित प्रतिनिधित्व मिलता।

शर्मा ने विपक्षी दलों को “परिवारवादी” बताते हुए कहा कि ये दल महिलाओं के अधिकारों के समर्थन का केवल दिखावा करते हैं और जब अधिकार देने की बात आती है तो पीछे हट जाते हैं।

शर्मा ने कहा, “17 अप्रैल संसदीय इतिहास में स्वर्णिम दिन बन सकता था, लेकिन विपक्ष की स्वार्थ की राजनीति ने इसे काला दिन बना दिया।”

इस मौके पर केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने भी विधेयक का समर्थन नहीं करने को लेकर विपक्ष की आलोचना की।

भाषा

बाकोलिया रवि कांत