नयी दिल्ली, 24 जुलाई (भाषा) राज्यसभा में सरकार ने शुक्रवार को एक विधेयक पेश किया, जिसके प्रावधानों के तहत राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के गायन के दौरान किसी भी तरह का व्यवधान डालना या उसका अपमान करना आपराधिक कृत्य माना जायेगा और इसके लिए तीन वर्ष तक की सजा हो सकती है।
सदन ने इस विधेयक के विरोध में विपक्ष द्वारा लाये गये प्रस्तावों को ध्वनिमत से खारिज कर दिया।
नीट प्रश्न पत्र लीक होने के मुद्दे पर उच्च सदन में विपक्ष के हंगामे के बीच गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने आसन की अनुमति से राष्ट्र गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किया। इस विधेयक के तहत 1971 के मूल अधिनियम में संशोधन का प्रावधान किया गया है।
संशोधन विधेयक के विरोध में प्रस्ताव रखते हुए मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के जॉन ब्रिटास ने कहा कि संविधान में जो बात तय हो चुकी है, संसद उसे सामान्य अधिनियम के जरिये संशोधित नहीं कर सकती है।
उन्होंने कहा कि यह संशोधन विधेयक पूर्णत: देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की मंशा पर आधारित है किंतु यह संविधान के उन संदर्भों की अनदेखी करता है जिनके आधार पर मूल कानून बनाया गया था।
ब्रिटास ने कहा कि संविधान सभा ने लगातार तीन वर्ष तक गहन विचार विमर्श करने के बाद राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत को एकसमान दर्जा नहीं दिया था। उन्होंने कहा, ‘‘वे (सरकार) किसी कानून के जरिये देशभक्ति और राष्ट्रवाद पैदा नहीं कर सकते। उनकी मंशा समाज का ध्रुवीकरण करना है।’’
विधेयक को पेश करने के विरोध में प्रस्ताव पेश करते हुए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के संदोष कुमार पी ने कहा कि वंदे मातरम् का उद्देश्य समाज को एकजुट करना है, बांटना नहीं। उन्होंने कहा कि इस बात को रवीन्द्रनाथ टैगोर सहित स्वतंत्रता संग्राम के नेता जानते थे, इसीलिए राष्ट्रगीत को केवल दो अंतरे तक ही सीमित रखा गया।
उन्होंने कहा कि वह भी ‘वंदे मातरम्’ से प्रेम करते हैं किंतु सरकार जानबूझ कर रवीन्द्र नाथ टैगोर और बंकिम चंद्र चटर्जी के बीच में भेद पैदा करना चाहती है और इसी लिए वह इस विधेयक का विरोध कर रहे हैं।
इसके उपरांत उपसभापति ने इस विधेयक को पेश करने के लिए सदन से सम्मति मांगी जिसे सदन ने स्वीकार कर लिया।
विधेयक के उद्देश्यों और कारणों में कहा गया है कि राष्ट्रगान की तरह राष्ट्रगीत को गाने से जानबूझ कर रोकने या ऐसे गायन में लगी किसी सभा में व्यवधान पैदा करने को एक दंडनीय अपराध बनाने का प्रावधान किया जाता है।
इसमें बताया गया है कि 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा में राजेन्द्र प्रसाद ने कहा था कि ‘‘वंदे मातरम्’’ को ‘‘जन गण मन’’ के समान ही सम्मान और बराबर का दर्जा दिया जाएगा।
इसमें कहा गया कि वर्तमान में कोई ऐसा विधिक उपबंध नहीं है जो ‘वंदे मातरम्’ गायन के अपमान को रोकता हो। विधेयक में राष्ट्रगीत के अपमान के लिए तीन वर्ष तक की सजा या जुर्माना अथवा दोनों के प्रावधान हैं।
भाषा माधव अविनाश
अविनाश