बिरला ने न्यायाधीश वर्मा को हटाने के कारणों पर जांच करने वाली समिति का पुनर्गठन किया

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बिरला ने न्यायाधीश वर्मा को हटाने के कारणों पर जांच करने वाली समिति का पुनर्गठन किया

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  • Publish Date - February 26, 2026 / 06:29 PM IST,
    Updated On - February 26, 2026 / 06:29 PM IST

नयी दिल्ली, 26 फरवरी (भाषा) लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने पिछले साल मार्च में न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के आवास से जली हुई नकदी बरामद होने के मामले में उन्हें पद से हटाने के कारणों की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय समिति का पुनर्गठन किया है।

लोकसभा सचिवालय के एक अधिकारी ने बृहस्पतिवार को बताया कि समिति को 26 फरवरी से तीन महीने का कार्यकाल विस्तार भी दिया गया है।

बिरला ने पिछले साल 12 अगस्त को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने के लिए एक बहुदलीय नोटिस स्वीकार करने के बाद महाभियोग की प्रक्रिया को तेज करते हुए समिति का गठन किया था।

लोकसभा महासचिव उत्पल कुमार सिंह द्वारा बुधवार को जारी एक अधिसूचना में कहा गया है कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा को हटाने के लिए जिन कारणों पर विचार की प्रार्थना की गई है, उनकी जांच के लिए तीन सदस्यों वाली समिति का आंशिक संशोधन के साथ पुनर्गठन किया है।

इस समिति में उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरविंद कुमार, बंबई उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति चन्द्रशेखर और कर्नाटक उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता बी.वी. आचार्य को शामिल किया गया है।

न्यायमूर्ति कुमार और आचार्य पिछली समिति का भी हिस्सा थे, न्यायमूर्ति चन्द्रशेखर नए सदस्य हैं। उन्होंने मद्रास उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश मनिन्द्र मोहन श्रीवास्तव का स्थान लिया है।

न्यायमूर्ति श्रीवास्तव 5 मार्च को 62 वर्ष का हो जाने पर पदमुक्त हो जाएंगे। उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की आयु 62 वर्ष है।

केंद्रीय विधि मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि जांच समिति ने कार्य पूरा करने में एक और वकील की सहायता मांगी है।

समिति की कार्यवाही अदालतों के कामकाज के तरीके से आयोजित की जाती है, जहां आरोपी अपना बचाव करने के लिए स्वतंत्र होते हैं।

नकदी की बरामदगी के बाद, न्यायमूर्ति वर्मा को वापस उच्च न्यायालय, इलाहाबाद भेज दिया गया था। घटना के समय वह दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश थे।

भाषा हक हक अविनाश

अविनाश