Birsa Munda Shaheed Diwas || Image- PM Modi Twitter
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा को उनके शहीद दिवस पर श्रद्धांजलि दी। प्रधानमंत्री ने कहा कि बिरसा मुंडा ने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए अंग्रेजी शासन के खिलाफ साहसपूर्वक संघर्ष किया। (Birsa Munda Shaheed Diwas) उन्होंने कहा कि मातृभूमि के लिए उनका बलिदान आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति की प्रेरणा देता रहेगा।
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धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा जी के बलिदान दिवस पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। उन्होंने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए विदेशी हुकूमत के विरुद्ध अदम्य साहस के साथ संघर्ष किया। उनका पूरा जीवन जनजातीय समाज के स्वाभिमान, संस्कृति और अधिकारों की रक्षा को समर्पित रहा। मातृभूमि के लिए सर्वस्व… pic.twitter.com/C4y15CKfjM
— Narendra Modi (@narendramodi) June 9, 2026
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बिरसा मुंडा ने ‘उलगुलान’ के माध्यम से भारत के स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी। वहीं उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि उनका जीवन साहस, आत्मसम्मान और न्याय के प्रति समर्पण का प्रतीक था। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी उन्हें नमन करते हुए कहा कि उन्होंने अपना पूरा जीवन आदिवासी समाज के अधिकारों और कल्याण के लिए समर्पित कर दिया।
अंग्रेजी शासन के अन्याय के विरुद्ध जनजातीय स्वाभिमान को नई ऊर्जा एवं ‘उलगुलान’ के अमर उद्घोष से भारत के स्वाधीनता संघर्ष को नई दिशा देने वाले ‘धरती आबा’ भगवान बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि पर शत-शत नमन।
त्याग, तप और राष्ट्रनिष्ठा से आलोकित आपका जीवन भारत की अमर प्रेरणा है। pic.twitter.com/MZb7My0YWK
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) June 8, 2026
Mumbai, Maharashtra: Chief Minister Devendra Fadnavis offered floral tributes to freedom fighter and tribal leader Bhagwan Birsa Munda on his martyrdom day at Lok Bhavan
(Source: CMO) pic.twitter.com/iCpFZTTOyZ
— IANS (@ians_india) June 9, 2026
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बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर 1875 को हुआ था। उन्होंने छोटानागपुर क्षेत्र में अंग्रेजों और शोषणकारी जमींदारों के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व किया। ‘धरती आबा’ के नाम से प्रसिद्ध बिरसा मुंडा ने 1899-1900 के दौरान ‘उलगुलान’ आंदोलन चलाया। (Birsa Munda Shaheed Diwas) अंग्रेजों ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था और 9 जून 1900 को रांची जेल में 25 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। उनकी मृत्यु आज भी रहस्य बनी हुई है।
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