बीजद और कांग्रेस ने ओडिशा में जनसंख्या अनुपात के आधार पर ओबीसी छात्रों के लिए कोटे की मांग की

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बीजद और कांग्रेस ने ओडिशा में जनसंख्या अनुपात के आधार पर ओबीसी छात्रों के लिए कोटे की मांग की

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  • Publish Date - April 5, 2026 / 10:30 PM IST,
    Updated On - April 5, 2026 / 10:30 PM IST

भुवनेश्वर, पांच अप्रैल (भाषा) बीजू जनता दल (बीजद) और कांग्रेस ने रविवार को ओडिशा में सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों (एसईबीसी) के छात्रों के लिए मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी द्वारा घोषित 11.25 प्रतिशत के बजाय जनसंख्या अनुपात के आधार पर आरक्षण का प्रावधान करने की मांग की।

मुख्यमंत्री ने शनिवार को घोषणा की कि राज्य मंत्रिमंडल ने अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और एसईबीसी छात्रों के लिए कोटा बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है और चिकित्सा एवं तकनीकी शिक्षा में ओबीसी (ओबीसी) के लिए आरक्षण लागू किया है।

मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि अनुसूचित जनजाति (एसटी) के छात्रों के लिए कोटा 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 22.50 प्रतिशत और अनुसूचित जाति (एससी) छात्रों के लिए कोटा आठ प्रतिशत से बढ़ाकर 16.25 प्रतिशत कर दिया गया है, जो उनकी जनसंख्या अनुपात के अनुसार है।

माझी ने कहा कि राज्य सरकार ने पहली बार अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए 11.25 प्रतिशत आरक्षण लागू किया है।

हालांकि, बीजद और कांग्रेस दोनों के नेताओं ने अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति और ओबीसी के बीच किए गए इस अंतर पर सवाल उठाए।

ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (ओपीसीसी) के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने पूछा, “जब अनुसूचित जनजातियों और अनुसूचित जातियों के लिए उनकी जनसंख्या के अनुपात के अनुसार आरक्षण घोषित किया गया है, तो राज्य की लगभग 54 प्रतिशत आबादी वाले अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए यह सिर्फ 11.25 प्रतिशत क्यों है?”

दास ने कहा, “हम मांग करते हैं कि ओबीसी को भी चिकित्सा और तकनीकी शिक्षा में उनकी जनसंख्या के अनुपात के अनुसार आरक्षण मिले। ओडिशा, झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में आदिवासियों, दलितों और ओबीसी की अधिक आबादी को देखते हुए कुल आरक्षण को 50 प्रतिशत के भीतर रखना निरर्थक है।”

बीजद विधायक और पूर्व मंत्री अरुण कुमार साहू ने भी इसी तरह की मांग रखी और तमिलनाडु, कर्नाटक और अन्य राज्यों का उदाहरण दिया, जहां कुल आरक्षण अनुपात 50 प्रतिशत से अधिक है।

साहू ने कहा, “ओडिशा सरकार के लिए यह सुनहरा अवसर है, क्योंकि वह खुद को ‘डबल इंजन’ वाली सरकार बताती है। राज्य सरकार को केंद्र सरकार से इस मामले पर बात करनी चाहिए और 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण का प्रावधान करना चाहिए।”

उन्होंने कहा, “हम मांग करते हैं कि कोटा जनसंख्या के अनुपात में तय किया जाए।”

बीजद विधायक और पूर्व मंत्री रणेंद्र प्रताप स्वैन ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘राज्य में लाखों अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए इस ऐतिहासिक घोषणा के साथ, मैं ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के इस निर्णय का व्यक्तिगत रूप से आभार व्यक्त करता हूं और स्वागत करता हूं।’

स्वैन ने कहा, ‘आने वाले दिनों में सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों को भी उनकी जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण प्रदान करने के लिए संघर्ष जारी रहेगा।’

माझी की घोषणा के अनुसार, नयी आरक्षण प्रणाली राज्य के विश्वविद्यालयों, उनसे संबद्ध कॉलेजों और शैक्षणिक संस्थानों, आईटीआई और पॉलिटेक्निक संस्थानों में इंजीनियरिंग, प्रौद्योगिकी, प्रबंधन, कंप्यूटर अनुप्रयोग, चिकित्सा, कृषि विज्ञान, वास्तुकला, और सिनेमाई कला के क्षेत्रों में लागू की जाएगी।

भाषा

राखी नरेश

नरेश