बीजद सदस्य ने सरकारी अस्पतालों में अव्यवस्था का मुद्दा राज्यसभा में उठाया

Ads

बीजद सदस्य ने सरकारी अस्पतालों में अव्यवस्था का मुद्दा राज्यसभा में उठाया

  •  
  • Publish Date - March 11, 2026 / 02:53 PM IST,
    Updated On - March 11, 2026 / 02:53 PM IST

नयी दिल्ली, 11 मार्च (भाषा) राज्यसभा में बुधवार को बीजू जनता दल की सदस्य सुलता देव ने सरकारी अस्पतालों में अव्यवस्था और समस्याओं का जिक्र करते हुए कहा कि अगर इन अस्पतालों में समुचित व्यवस्था और सुविधा हो तो मरीजों को निजी अस्पतालों में जा कर महंगा इलाज नहीं कराना पड़ेगा।

शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए सुलता ने कहा कि रोटी कपड़ा और मकान की तरह स्वास्थ्य सेवा भी बहुत जरूरी है लेकिन आज की स्वास्थ्य सेवाएं क्या मानकों पर खरी उतरी हैं?

उन्होंने कहा कि गंभीर हालत में मरीज अस्पताल जाते हैं लेकिन बिस्तर की समस्या आती है और कई अस्पतालों में बेड नहीं मिल पाता जिसके कारण मरीज जमीन पर पड़े नजर आते हैं। ‘‘ कभी डॉक्टर नहीं होते तो कभी अन्य स्वास्थ्य कर्मी नहीं होते और कभी सुविधाएं नहीं होतीं।’’

बीजद सदस्य ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त सुविधाओं का अभाव होने के कारण मरीजों को निजी अस्पताल जाना पड़ता है जहां उनका शोषण होता है और वहां का इलाज तो इतना महंगा होता है कि मरीज का परिवार बदहाल हो जाता है।

उन्होंने सदन में मौजूद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा से कहा कि सरकारी अस्पतालों में अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं दी जानी चाहिए।

सुलता ने कहा कि गंभीर रूप से बीमार मरीजों को गहन चिकित्सा इकाई में भर्ती किया जाता है लेकिन कई अस्पतालों में आईसीयू की हालत भी अच्छी नहीं है।

उन्होंने ओडिशा के एक अस्पताल के वीडियो का जिक्र किया जिसमें आईसीयू में भर्ती डिमेन्शिया से पीड़ित एक बेसुध मरीज के हाथ पैर बांध दिए गए थे, उनका रक्तस्राव हो रहा था और वहां कोई नहीं था।

सुलता ने कहा ‘‘ऐसी व्यवस्था अस्पताल में होनी चाहिए कि मरीज के परिजन उसकी निगरानी कर सकें क्योंकि आईसीयू में परिजन को जाने की अनुमति नहीं होती। आईसीयू में क्रिटिकल यूनिट में ऐसे कर्मचारी होने चाहिए जो मरीज के साथ सम्मानजनक व्यवहार करें और अगर उसकी मृत्यु हो जाए तो उसके शव का अनादर नहीं किया जाना चाहिए।’’

आदिवासी बहुल इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव का जिक्र करते हुए सुलता ने मांग की कि ओडिशा में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) खोला जाना चाहिए।

भाषा

मनीषा हक

हक