भाजपा ‘केवल अमीरों का पक्ष लेती है’ जबकि हम गरीबों की परवाह करते हैं: मुख्यमंत्री सिद्धरमैया

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भाजपा ‘केवल अमीरों का पक्ष लेती है’ जबकि हम गरीबों की परवाह करते हैं: मुख्यमंत्री सिद्धरमैया

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  • Publish Date - April 2, 2026 / 07:44 PM IST,
    Updated On - April 2, 2026 / 07:44 PM IST

दावणगेरे (कर्नाटक), दो अप्रैल (भाषा) कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने बृहस्पतिवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा हमला करते हुए ‘‘धनवानों का पक्ष लेने’’ का आरोप लगाया और जोर देकर कहा कि उनकी कांग्रेस सरकार गरीबों के साथ मजबूती से खड़ी है।

सिद्धरमैया ने दावणगेरे दक्षिण निर्वाचन क्षेत्र में एक चुनावी कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से कहा कि भाजपा एक ऐसे आर्थिक मॉडल का समर्थन करती है जिससे अमीरों को लाभ होता है, जबकि कांग्रेस सरकार वंचितों के उत्थान के उद्देश्य से कल्याणकारी उपायों के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जारी चुनावी अभियान को लेकर जनता की प्रतिक्रिया उम्मीदों से कहीं अधिक रही है और यह मतदाताओं के बीच बढ़ती जागरूकता को दर्शाती है।

उन्होंने कहा, ‘‘चुनाव प्रचार में लोगों की प्रतिक्रिया हमारी उम्मीदों से कहीं बेहतर रही है। लोगों को यह एहसास हो गया है कि भाजपा चार साल सत्ता में रहने के बावजूद कुछ नहीं कर पाई।”

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाते हुए कहा कि पिछली सरकार ने “कोई विकास कार्य नहीं किया और केवल राज्य को लूटा।”

सिद्धरमैया ने सरकार की प्रमुख गारंटी योजनाओं का बचाव करते हुए कहा कि पिछले तीन वर्षों में इन्हें सफलतापूर्वक लागू किया गया है और इनसे जनता का विश्वास बहाल हुआ है।

उन्होंने कहा, “हम हर साल लगभग 52,000 करोड़ रुपये खर्च कर रहे हैं और 31 मार्च तक 1.31 लाख करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। इसलिए इन योजनाओं को लेकर कोई सवाल ही नहीं उठता—हम इन्हें जारी रखेंगे।” उन्होंने भाजपा के इस दावे को खारिज कर दिया कि इन कार्यक्रमों से राज्य दिवालिया हो जाएगा।

उन्होंने बढ़ते कर्ज को लेकर हो रही आलोचना को खारिज करते हुए कहा कि उधारी अनुमेय सीमा के भीतर ही है।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बी. वाई. विजयेंद्र द्वारा राज्य के वित्त पर श्वेत पत्र की मांग का जवाब देते हुए सिद्धरमैया ने कहा कि सभी विवरण पहले ही बजट में प्रस्तुत किए जा चुके हैं और विधानसभा में उन पर बहस हो चुकी है।

उन्होंने कहा, ‘‘फिर से श्वेत पत्र की मांग क्यों की जा रही है? क्या बजट स्वयं ही एक श्वेत पत्र नहीं है?’’ उन्होंने कहा कि उन्होंने साढ़े चार घंटे से अधिक समय तक चर्चा

भाषा यासिर नरेश

नरेश