(फाइल फोटो के साथ)
जयपुर, 11 मार्च (भाषा) राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बुधवार को नरेन्द्र मोदी सरकार पर असहिष्णुता और तानाशाही प्रवृत्तियों का आरोप लगाया।
गहलोत ने एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला दिया जिसमें कहा गया है कि सोशल मीडिया मंच को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से जुड़े व्यंग्यात्मक और आलोचनात्मक पोस्ट हटाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की असहिष्णुता और तानाशाही प्रवृत्ति अब चरम पर पहुंच गई है।
गहलोत ने कहा, “ खबरें कहती हैं कि केंद्र सरकार ने एक्स और इंस्टाग्राम को प्रधानमंत्री से जुड़े व्यंग्यात्मक और आलोचनात्मक पोस्ट हटाने के सख्त निर्देश दिए हैं। एक मजबूत लोकतंत्र में आलोचना और व्यंग्य का स्वागत होना चाहिए, लेकिन सच और सवालों से इतना डरना दिखाता है कि इस सरकार ने लोकतांत्रिक मूल्यों में अपना विश्वास खो दिया है।”
उन्होंने कहा कि विडंबना यह है कि कथित सेंसरशिप से दक्षिणपंथी समर्थक भी नहीं बचे हैं।
गहलोत ने कहा, “सबसे बड़ी विडंबना यह है कि सरकार का अंधाधुंध समर्थन करने वाले दक्षिणपंथी समर्थकों के अकाउंट भी सिर्फ नए यूजीसी नियमों पर सवाल उठाने के कारण बंद कर दिए गए। पुलिस ने कई दक्षिणपंथी इन्फ्लुएंसर्स के घर जाकर उन्हें धमकाया भी है।”
गहलोत ने आरोप लगाया कि यह घटनाक्रम दिखाता है कि मोदी सरकार को किसी विचारधारा या समर्थकों से कोई लगाव नहीं है, उसे सिर्फ अंधभक्ति चाहिए, जिसमें सवाल न उठाए जाएं।
उन्होंने कहा कि भाजपा समर्थकों को भी सोचना चाहिए कि देश में क्या हो रहा है। उन्होंने दावा किया कि यह देश में घोषित न की गई आपातकाल जैसी स्थिति है, जो बेहद चिंताजनक है।
भाषा बाकोलिया
राजकुमार
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