भाजपा सरकार की अलोकतांत्रिक सोच से राजस्थान में संवैधानिक संकट गहराया: गहलोत

भाजपा सरकार की अलोकतांत्रिक सोच से राजस्थान में संवैधानिक संकट गहराया: गहलोत

भाजपा सरकार की अलोकतांत्रिक सोच से राजस्थान में संवैधानिक संकट गहराया: गहलोत
Modified Date: April 8, 2026 / 09:39 am IST
Published Date: April 8, 2026 9:39 am IST

जयपुर, आठ अप्रैल (भाषा) पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजस्थान में स्थानीय निकायों के चुनाव समय पर नहीं कराए जाने को लेकर बुधवार को राज्य की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि राज्य सरकार की अलोकतांत्रिक सोच से राजस्थान में संवैधानिक संकट गहराता जा रहा है।

गहलोत ने एक बयान में कहा, ‘‘भाजपा सरकार की अलोकतांत्रिक सोच के कारण राजस्थान में संवैधानिक संकट गहराता जा रहा है।’’

उन्होंने आरोप लगाया कि पंचायतों और नगरीय निकायों में एक वर्ष से अधिक समय से चुनाव नहीं कराए जाना और उनकी जगह सरकारी प्रशासकों की नियुक्ति, यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सीधा प्रहार है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के अनुसार संविधान का अनुच्छेद 243ई स्पष्ट करता है कि पंचायतों का कार्यकाल पांच वर्ष का होगा और समय पर चुनाव अनिवार्य हैं। इसी प्रकार अनुच्छेद 243यू नगरीय निकायों के लिए भी यही बाध्यता तय करता है। वहीं अनुच्छेद 243के के तहत राज्य निर्वाचन आयोग को स्वतंत्र संवैधानिक संस्था के रूप में स्थापित किया गया है, जिसकी जिम्मेदारी चुनाव कराना है। यह किसी सरकार की इच्छा का विषय नहीं, बल्कि संविधान द्वारा निर्धारित अनिवार्य दायित्व है।

उन्होंने कहा, ‘‘इसके बावजूद, राज्य सरकार ने परिसीमन, पुनर्गठन और तथाकथित “वन स्टेट, वन इलेक्शन” जैसे बहानों के पीछे छिपकर चुनावों को टालने का प्रयास किया, जबकि उच्चतम न्यायालय ने विकास किशनराव गवली (2021) मामले में स्पष्ट रूप से कहा है कि ये वजहें चुनाव टालने का वैध आधार नहीं हो सकतीं।’’

गहलोत के अनुसार राजस्थान उच्च न्यायालय ने फरवरी, मार्च और नवंबर 2025 में बार-बार निर्देश दिए, लेकिन सरकार ने हर बार इनकी अनदेखी की। अंततः 439 याचिकाओं पर एक साथ निर्णय देते हुए न्यायालय ने 15 अप्रैल 2026 की अंतिम समयसीमा निर्धारित की। उच्चतम न्यायालय द्वारा ‘एसएलपी’ खारिज कर इस आदेश को बरकरार रखा जाना इस बात का प्रमाण है कि न्यायपालिका ने अपना पक्ष स्पष्ट कर दिया है लेकिन सरकार की ओर से अब तक गंभीरता का अभाव दिखाई देता है।

उन्होंने कहा, ‘‘जब कोई सरकार संविधान के अनुच्छेद 243ई, 243यू और 243के का लगातार उल्लंघन करे, नागरिकों के मताधिकार को एक वर्ष से अधिक समय तक बाधित रखे और न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों की अवहेलना करे तो यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि एक स्पष्ट संवैधानिक विघटन की स्थिति है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘73वें और 74वें संविधान संशोधनों की मूल भावना विकेंद्रीकरण, स्थानीय स्वशासन और जनता की भागीदारी को इस प्रकार कुचलना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।’’

पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत के अनुसार, ‘‘भाजपा सरकार को यह समझना होगा कि लोकतंत्र केवल सत्ता चलाने का माध्यम नहीं, बल्कि संविधान के प्रति जवाबदेही का दायित्व है। राजस्थान की जनता अपने अधिकारों के हनन को चुपचाप स्वीकार नहीं करेगी।’’

भाषा पृथ्वी सुरभि

सुरभि


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