(फाइल फोटो के साथ)
बेंगलुरु, 22 जून (भाषा) ग्रेटर बेंगलुरु विकास मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा द्वारा शहर की समस्याओं को लेकर बार-बार ‘विरासत में मिली दिक्कतों और व्यवस्था की विफलताओं’ का उल्लेख किये जाने पर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और वरिष्ठ भाजपा नेता आर. अशोक ने सोमवार को आरोप लगाया कि गौड़ा अपने पूर्ववर्ती डी के शिवकुमार की ‘‘विनाशकारी विरासत’’ से दूरी बनाकर पहले से ही अपने बचाव की तैयारी कर रहे हैं।
अशोक ने यह भी दावा किया कि ग्रेटर बेंगलुरु विकास विभाग और उससे जुड़े विभागों को लेकर शिवकुमार एवं गौड़ा के बीच मतभेद हैं।
कर्नाटक की पिछली सिद्धरमैया सरकार में शिवकुमार बेंगलुरु विकास विभाग के प्रभारी थे।
अशोक ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “कृष्णा बायरे गौड़ा बनाम डी के शिवकुमार: कांग्रेस का बेंगलुरु गृहयुद्ध अब खुलकर सामने आ गया है। अनिच्छा से बेंगलुरु विकास विभाग का कार्यभार संभालने के बाद से गौड़ा लगातार अपने पूर्ववर्ती डी के शिवकुमार की छोड़ी हुई विरासत से दूरी बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उनके हर बयान और साक्षात्कार से यही संदेश मिल रहा है कि बेंगलुरु पहले से ही बदहाल था, इसके लिए उन्हें दोष न दिया जाए।”
उन्होंने कहा कि गौड़ा की टिप्पणियां वास्तव में पिछली बेंगलुरु प्रशासन व्यवस्था पर सरेआम ठीकरा फोड़ने के समान हैं।
अशोक ने कहा, ‘‘जब कोई मंत्री यह कहते हैं कि शहर की सबसे बड़ी समस्या कमजोर प्रशासन, नियमों के पालन में कमी, अवैध लेआउट और चरमराती प्रशासनिक व्यवस्था है, तो वह विपक्ष पर हमलावर नहीं, बल्कि पिछले तीन वर्षों में शहर का नेतृत्व करने वाले प्रशासन पर सवाल उठा रहे हैं।’’
कृष्णा बायरे गौड़ा ने शहर से जुड़े प्रमुख विभागों का पूर्ण आवंटन नहीं होने का हवाला देते हुए ग्रेटर बेंगलुरु विकास विभाग का कार्यभार संभालने में देरी की थी। वह इस बात से असंतुष्ट थे कि मुख्यमंत्री ने बेंगलुरु विकास प्राधिकरण (बीडीए) और बेंगलुरु महानगरीय क्षेत्र विकास प्राधिकरण (बीएमआरडीए) जैसे प्रभावशाली निकायों को अपने नियंत्रण में रखा है।
वर्तमान में गौड़ा के पास ग्रेटर बेंगलुरु प्राधिकरण (जीबीए), इसके अंतर्गत आने वाले पांच नगर निगमों, बेंगलुरु जल आपूर्ति एवं सीवरेज बोर्ड (बीडब्ल्यूएसएसबी) तथा बेंगलुरु मेट्रो की जिम्मेदारी है।
अशोक ने कहा कि पिछले तीन वर्षों से शिवकुमार ‘ब्रांड बेंगलुरु’ का प्रचार करते रहे, लेकिन अब उनके ही एक मंत्री यह संकेत दे रहे हैं कि शहर अव्यवस्था, यातायात जाम, जलभराव, कचरा, अवैध निर्माण और प्रशासनिक ठहराव जैसी समस्याओं से जूझ रहा है।
उन्होंने सवाल किया, “यदि बेंगलुरु की समस्याएं कमजोर प्रशासन का परिणाम हैं, तो शहर का प्रशासन कौन चला रहा था? यदि नियम लागू नहीं किए गए, तो जिम्मेदार कौन था? यदि अवैध लेआउट फलते-फूलते रहे, तो इसकी अनदेखी किसने की? इन सभी सवालों का जवाब एक ही व्यक्ति की ओर इशारा करता है।”
भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि गौड़ा बार-बार ‘विरासत में मिली समस्याओं’, ‘दशकों पुरानी चुनौतियों’ और ‘व्यवस्था की विफलताओं’ का जिक्र कर यह संकेत दे रहे हैं कि हालात इतने खराब हैं कि शायद उनके लिए भी सुधारना मुश्किल होगा।
अशोक ने कहा, “कांग्रेस सरकार के अपने ही मंत्री यह स्वीकार कर रहे हैं कि उन्हें ऐसा शहर प्रशासन विरासत में मिला है जो पतन के कगार पर पहुंच चुका है। यह विपक्ष का आरोप नहीं बल्कि मंत्रिमंडल के भीतर से आयी स्वीकारोक्ति है।”
भाषा राजकुमार नरेश
नरेश