नयी दिल्ली, 17 मार्च (भाषा) लोकसभा में मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक सांसद ने दिल्ली में रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की भीड़ बढ़ने का हवाला देते हुए उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्टेशन को उपगरीय स्टेशन घोषित करने की मांग की।
वित्त वर्ष 2026-27 के लिए रेल मंत्रालय से संबंधित अनुदान मांगों पर चर्चा में भाग लेते हुए गाजियाबाद से भाजपा के लोकसभा सदस्य अतुल गर्ग ने कहा कि करीब 25 साल पहले राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र बोर्ड बनाया गया था, जिसका उद्देश्य दिल्ली को विकेंद्रीकृत करना था।
उन्होंने कहा कि दिल्ली स्थित रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की भीड़ बढ़ती जा रही है।
भाजपा सांसद ने कहा, ‘‘20-25 ट्रेनें ऐसी हैं जो दिल्ली से परिचालित होती हैं लेकिन गाजियाबाद में नहीं रुकती है। जबकि (दिल्ली में) सराय रोहिल्ला, आनंद विहार जैसे तीन-चार ऐसे स्टेशन हैं, जो सैटेलाइट (उपनगरीय) रेलवे स्टेशन की तरह काम करते हैं।’’
उन्होंने गाजियाबाद रेलवे स्टेशन को दिल्ली का उपनगरीय रेलवे स्टेशन बनाने की मांग की। गर्ग ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी से उत्तर प्रदेश और बिहार की ओर जाने वाली कई ट्रेनों का परिचालन दिल्ली से करने के बजाय गाजियाबाद से किये जाने पर दिल्ली में यात्रियों की संख्या में कमी आएगी और वहां के लोगों को बहुत सुविधा होगी।
कांग्रेस की ज्योत्सना चरणदास महंत ने कहा कि सरकार कहती है कि रेलवे जीवनरेखा है, लेकिन ‘‘मुझे लगता है कि रेलवे सिर्फ मुनाफे की रेखा बनकर रह गई है।’’
उन्होंने कहा कि रेलवे छत्तीसगढ़ से कोयले की ढुलाई कर अरबों रुपये कमाती है, लेकिन जब इस क्षेत्र को सुविधा देने की बात आती है तो हाथ पीछे खींच लिया जाता है।
महंत ने अपने निर्वाचन क्षेत्र कोरबा को उपेक्षित किये जाने का आरोप लगाते हुए कहा, ‘‘क्या बजट केवल राजधानियों को जोड़ने के लिए है, या छोटे स्टेशनों को जोड़ने के लिए भी है?’’
कांग्रेस सांसद ने कहा, ‘‘सरकार वंदे भारत की बात कर रही है, लेकिन उनके इलाके में यात्रियों को पैसेंजर ट्रेन से यात्रा के लिए चार-चार घंटे इंतजार करना पड़ता है। वहां वंदे भारत का विज्ञापन जले पर नमक छिड़कने जैसा लगता है। मुझे लगता है कि रेलवे छत्तीसगढ़ को केवल एक दुधारू गाय समझता है।’’
उन्होंने कोरोना काल में बंद की गई ट्रेनों का परिचालन पुन: शुरू करने की भी मांग की।
कांग्रेस के राहुल कस्वां ने ट्रेनों में सफर को आरामदेह बनाने के लिए आईसीएफ (पारंपरिक डिब्बे) की जगह एलएचबी (हल्के, अपेक्षाकृत सुरक्षित और स्टेनलेस) डिब्बों का उपयोग किये जाने की सराहना की।
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा, ‘‘एलएचबी भी 38 साल पुरानी जर्मन प्रौद्योगिकी है, जिनमें आज भी कपलिंग की बहुत बड़ी समस्या है जिसके चलते ट्रेनों में झटके लगते हैं। इस पर विचार करने की जरूरत है।’’
उन्होंने सामान्य श्रेणी के डिब्बों में यात्रियों को होने वाली परेशानियों का मुद्दा उठाते हुए रेल मंत्री से ऐसी योजना बनाने का आग्रह किया कि सामान्य डिब्बों की ट्रेन स्पेशल सुपरफास्ट के रूप में चलाई जाए।
भाजपा के कामाख्या प्रसाद तासा ने चर्चा में भाग लेते हुए, रेलवे की जोनल बैठक को नियमित किये जाने की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि रेलवे बोर्ड को लिखे जाने वाले पत्र का जवाब जल्द मिलना चाहिए।
उन्होंने रेलवे स्टेशनों पर फार्मेसी की भी व्यवस्था करने की मांग की।
केरल कांग्रेस के सांसद के. फ्रांसिस जॉर्ज ने कहा, ‘‘रेलवे हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी है और यह केवल घोषणाओं के सहारे नहीं चल सकती।’’
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