नयी दिल्ली, 16 जुलाई (भाषा) भाजपा ने बृहस्पतिवार को कांग्रेस के उस आरोप को खारिज कर दिया कि वह 20 जुलाई से शुरू होने वाले मानसून सत्र में परिसीमन पर संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत हासिल करने के मकसद से पार्टियों को ‘‘विभाजित’’ कर रही है।
सत्ताधारी पार्टी ने कहा कि जो नेता विपक्ष छोड़कर दूसरी पार्टियों में शामिल हो रहे हैं और दल-बदल रोधी कानून का पालन कर रहे हैं, उनके इस कदम को गैर-कानूनी नहीं कहा जा सकता।
भाजपा ने विपक्ष पर यह आरोप भी लगाया कि वे ‘‘वंशवादी’’ राजनीति के हितों की रक्षा के लिए परिसीमन का विरोध कर रहे हैं।
इससे पहले, कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया था कि सरकार विभिन्न राजनीतिक दलों को तोड़कर संसद में दो-तिहाई बहुमत हासिल करने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने कहा, ‘‘यदि पार्टियों को तोड़कर दो-तिहाई बहुमत हासिल किया जाता है तो ऐसा बहुमत लोकतंत्र पर एक धब्बा होगा। लेकिन हमें नहीं लगता कि उन्हें ऐसा बहुमत मिलने की कोई गुंजाइश है।’’
आरोपों का जवाब देते हुए भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता तुहिन सिन्हा ने कहा कि लोकतंत्र हमेशा से ‘‘संख्या बल का खेल’’ रहा है। उन्होंने इस आरोप को खारिज कर दिया कि भाजपा गैर-कानूनी तरीकों से संख्या बल जुटा रही है।
सिन्हा ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘जयराम रमेश ने आरोप लगाया है कि भाजपा दो-तिहाई बहुमत पाने के लिए गैर-कानूनी तरीके से पार्टियों को तोड़ रही है। यह पूरी तरह से गलत है।’’
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र संख्या बल के आधार पर चलता है और यह हमेशा से ही संख्या बल का खेल रहा है।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा, ‘‘1996 में एक समय ऐसा था जब हमारी 13 दिन की सरकार इसलिए नहीं टिक पाई क्योंकि हमारे पास जरूरी संख्या बल नहीं था। तीस साल बाद, हालात फिर बदले हैं। कई विपक्षी दल कांग्रेस की पिछड़ी और अड़ियल राजनीति से पूरी तरह निराश और नाराज हैं।’’
सिन्हा ने कहा कि दल-बदल रोधी कानून के दायरे में हुए सभी राजनीतिक बदलाव कानूनी हैं। उन्होंने कहा, ‘‘वे विपक्ष से अलग होकर भाजपा के साथ जुड़ना चाहते हैं। लेकिन ऐसा करते समय हमने यह सुनिश्चित किया है कि दल-बदल रोधी कानून के सभी नियमों का पालन हो और उनका सम्मान किया जाए।’’
भाजपा नेता ने कहा, ‘‘अगर दल-बदल रोधी कानून के प्रावधानों का पालन करते हुए तृणमूल कांग्रेस के 22 सदस्य अलग होकर कोई नयी पार्टी बनाते हैं या किसी दूसरी पार्टी के साथ जुड़ जाते हैं, या अगर उद्धव ठाकरे की पार्टी विभाजित होकर किसी दूसरी पार्टी में मिल जाती है, तो इसमें हमारी क्या गलती है? यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है।’’
उन्होंने परिसीमन के प्रति कांग्रेस के विरोध को खारिज करते हुए आरोप लगाया कि पार्टी को डर है कि इस प्रक्रिया से राजनीतिक परिवारों का दबदबा कमजोर हो जाएगा।
सिन्हा ने कहा, ‘‘जयराम रमेश कहते हैं कि वे परिसीमन का पुरजोर विरोध करेंगे। यह कांग्रेस पार्टी की विशेषाधिकार वाली मानसिकता को दर्शाता है। वे युवा-विरोधी और महिला-विरोधी हैं।’’
उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया काफी समय से लंबित है और इससे राजनीति में नए लोगों के लिए अवसर पैदा होंगे।
सिन्हा ने कहा कि पिछली बार परिसीमन 1975 में हुआ था इसलिए, अब यह प्रक्रिया होनी चाहिए।
भाषा शफीक माधव
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