भाजपा ने 30 दिन जेल में रहने पर मंत्रियों को हटाने संबंधी विधेयक का विरोध करने पर कांग्रेस को घेरा

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भाजपा ने 30 दिन जेल में रहने पर मंत्रियों को हटाने संबंधी विधेयक का विरोध करने पर कांग्रेस को घेरा

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  • Publish Date - July 6, 2026 / 05:24 PM IST,
    Updated On - July 6, 2026 / 05:24 PM IST

नयी दिल्ली, छह जुलाई (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सोमवार को आरोप लगाया कि कांग्रेस गंभीर आपराधिक मामलों में लगातार 30 दिन तक न्यायिक हिरासत में रहने पर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री को उनके पद से हटाने के प्रावधान वाले विधेयक का इसलिए विरोध कर रही है, क्योंकि ‘‘कांग्रेस को लगता है कि उसे भ्रष्टाचार करने से नहीं रोका जाना चाहिए।

भाजपा की यह टिप्पणी कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश के इस बयान के एक दिन बाद आई है कि यह संविधान संशोधन विधेयक विरोधियों को “राजनीतिक रूप से परेशान” करने के मकसद से लाया गया है और उनकी पार्टी इसका पुरजोर विरोध करेगी।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि प्रस्तावित कानून का मकसद कार्यकारी पदों पर बैठे लोगों के लिए जवाबदेही के समान मानक तय करना है।

पूनावाला ने एक वीडियो संदेश में कहा, “कुछ ऐसे लोग हैं, जिन्हें लगता है कि सिर्फ उन्हीं को सब कुछ पाने का हक है। उन्हें लगता है कि भ्रष्टाचार करना उनका अधिकार है। वे भ्रष्टाचार में शामिल होते हैं और अगर कोई उन्हें पकड़ ले, तो वे उत्पीड़न का रोना रोने लगते हैं।”

उन्होंने कहा, “भ्रष्टाचार और अपराध को अपना अधिकार समझने की इस सोच को खत्म किया जा रहा है।”

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का जिक्र करते हुए पूनावाला ने सवाल उठाया कि क्या कोई निर्वाचित मुख्यमंत्री जेल से शासन चलाना जारी रख सकता है।

उन्होंने कहा, “संविधान निर्माताओं ने कभी नहीं सोचा था कि अगर कोई मुख्यमंत्री या सरकार का कोई पदाधिकारी जेल जाता है, तो वह इस्तीफा नहीं देगा। हमने अरविंद केजरीवाल के मामले में ऐसा देखा, जिन्होंने जेल में रहते हुए भी सरकार चलाना जारी रखा। क्या प्रशासनिक तौर पर ऐसा मुमकिन है? यह ईमानदारी का भी सवाल है।”

पूनावाला ने विपक्षी दलों पर सार्वजनिक पद से इस्तीफे के मुद्दे पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाया।

उन्होंने दावा किया, “पहले तो वे (विपक्षी नेता) एक आरोप का संकेत भर मिलने पर लोगों से इस्तीफा मांगते थे। अब जब अदालतें उन्हें एक के बाद एक मामलों में जेल भेज रही हैं, तो वे इस्तीफा नहीं दे रहे हैं।”

भाजपा प्रवक्ता ने सवाल उठाया कि निर्वाचित प्रतिनिधियों के साथ अलग व्यवहार क्यों किया जाना चाहिए। उन्होंने सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों और आम नागरिकों के लिए एक समान मानक की वकालत की।

पूनावाला ने पूछा, “अगर कोई आम आदमी जेल जाता है, तो क्या उसे एक दिन भी अपनी नौकरी जारी रखने की इजाजत मिलेगी? उसे तुरंत निलंबित कर दिया जाएगा। तो फिर निर्वाचित प्रतिनिधियों और कार्यकारी पदों पर बैठे लोगों के लिए अलग कानूनी पैमाना क्यों होना चाहिए?”

उन्होंने कहा कि विधेयक को पहले ही संसद की संयुक्त समिति के पास भेजा जा चुका है और विपक्षी दलों को सीधे इसका विरोध करने के बजाय समिति की सिफारिशों का इंतजार करना चाहिए।

पूनावाला ने कहा, “समिति को अपनी रिपोर्ट पेश करने दें। लोग इसका विरोध क्यों कर रहे हैं? क्या वे सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी और मर्यादा नहीं चाहते? क्या उन्हें लगता है कि उन्हें अपराध और भ्रष्टाचार करने की छूट है?”

कांग्रेस पर भ्रष्टाचार में लिप्त लोगों को बचाने का आरोप लगाते हुए पूनावाला ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस राजनीतिक संस्कृति को बदलने के लिए काम कर रहे हैं।

भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया, ‘‘ऐसा लगता है कि उनके लिए लोगों की, लोगों द्वारा, लोगों के लिए चुनी गई सरकार नहीं होनी चाहिए। उनके लिए अपराधियों की, अपराधियों द्वारा, अपराधियों के लिए चुनी गई सरकार होनी चाहिए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस सोच के खिलाफ लड़ रहे हैं।”

सूत्रों के मुताबिक, संबंधित विधेयकों पर विचार कर रही संसदीय समिति 17 जुलाई को अपनी रिपोर्ट को मंजूरी दे सकती है और इसे संसद के आगामी मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में पेश कर सकती है।

भाषा पारुल सुरेश

सुरेश