छत्रपति संभाजीनगर, 17 अगस्त (भाषा) महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में बंबई उच्च न्यायालय की लिपिक भर्ती की ‘टाइपिंग परीक्षा’ में तकनीकी गड़बड़ियों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने रविवार देर रात अपना आंदोलन समाप्त कर दिया। हालांकि, उन्होंने प्रशासन को समस्याओं को दूर करने और दोबारा परीक्षा आयोजित करने की घोषणा के लिए एक सप्ताह का समय दिया है।
रविवार को प्रदर्शन में शामिल हुए कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के संयोजक अभिजीत दीपके ने परीक्षा में आई तकनीकी गड़बड़ियों को ‘‘व्यवस्था की नाकामी’’ बताया और अभ्यर्थियों की मांगों का समर्थन किया।
बंबई उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार (कार्मिक) की ओर से रविवार को जारी एक सूचना में कहा गया कि एजेंसी के माध्यम से क्लर्क पद के लिए आयोजित टाइपिंग परीक्षा कुल मिलाकर सुचारु रूप से हुई, हालांकि कुछ परीक्षा केंद्रों, विशेषकर औरंगाबाद (छत्रपति संभाजीनगर) और कल्याण (ठाणे जिले) में कुछ तकनीकी समस्याएं सामने आईं।
सूचना में कहा गया है कि एजेंसी द्वारा कराई गई परीक्षा प्रक्रिया में सामने आई तकनीकी समस्याओं की जांच की जा रही है और आगे की उचित कार्रवाई के बारे में अभ्यर्थियों को आधिकारिक सूचना के माध्यम से अवगत कराया जाएगा।
अभ्यर्थियों ने शिकायत की कि परीक्षा के दौरान कंप्यूटर बंद हो गए, जबकि कुछ ने बताया कि कंप्यूटर स्क्रीन पीली हो गई और कीबोर्ड ने काम करना बंद कर दिया।
छत्रपति संभाजीनगर के विभिन्न केंद्रों पर मराठवाड़ा और विदर्भ के करीब 2,900 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए। वहीं, महाराष्ट्र भर में करीब 13,000 अभ्यर्थी इस परीक्षा के लिए पात्र थे। यह परीक्षा तीन पालियों में उच्च न्यायालय की नागपुर और औरंगाबाद पीठ के तहत 1,300 लिपिक पदों के लिए आयोजित की गई थी।
परीक्षा में शामिल कई अभ्यर्थियों ने रविवार को छत्रपति संभाजीनगर में प्रदर्शन शुरू कर दिया। दीपके ने आरोप लगाया कि कई अभ्यर्थियों को उनकी गलती के बिना ही अनुत्तीर्ण घोषित कर दिया गया। उन्होंने परीक्षा दोबारा आयोजित करने की मांग की।
बहरहाल, अभ्यर्थियों ने रविवार देर रात आंदोलन समाप्त कर दिया और प्रशासन से एक सप्ताह के भीतर आवश्यक सुधार करने तथा दोबारा परीक्षा आयोजित करने की मांग की।
बाद में पत्रकारों से बातचीत में दीपके ने कहा कि यदि एक सप्ताह में समस्या का समाधान नहीं किया गया तो पूरे महाराष्ट्र में आंदोलन किया जाएगा।
उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘रविवार को कई केंद्रों पर परीक्षा आयोजित की गई थी। लेकिन परीक्षा के दौरान कंप्यूटर और कीबोर्ड ठीक से काम नहीं कर रहे थे। सर्वर में भी समस्या थी। कई अभ्यर्थी परीक्षा पूरी किए बिना ही असफल घोषित कर दिए गए।’’
उन्होंने कहा, ‘‘यह व्यवस्था की नाकामी है और नौकरी के अभ्यर्थी इसके खिलाफ आंदोलन कर रहे थे। उच्च न्यायालय ने भी इस आंदोलन का संज्ञान लिया है और कहा कि वह समस्याओं की जांच करेगा तथा आवश्यक कदम उठाएगा।’’
हालांकि, प्रदर्शनकारी पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। दीपके ने कहा कि उन्होंने दोबारा परीक्षा कराने समेत अन्य मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई के लिए एक सप्ताह का समय दिया है। उन्होंने कहा कि उनकी सबसे बड़ी मांग दोबारा परीक्षा आयोजित करना है और यह परीक्षा किसी तीसरी एजेंसी के बजाय उच्च न्यायालय की निगरानी में करायी जानी चाहिए।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया तो अभ्यर्थियों के पास दोबारा आंदोलन करने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा। उन्होंने कहा कि इस बार आंदोलन और बड़ा तथा पूरे राज्य में होगा और मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा।
भाषा गोला मनीषा
मनीषा