नयी दिल्ली, 17 अगस्त (भाषा) पर्यावरण मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी ने सोमवार को कहा कि गत दो दशकों में, ब्रिक्स गठबंधन का दायरा बढ़ा है और यह अब केवल आर्थिक बातचीत तक सीमित न रहकर, पर्यावरण से जुड़ी अहम चुनौतियों के प्रति रुख तय करने का एक मंच बन गया है।
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव तन्मय कुमार के अनुसार, इस गठबंधन ने सतत विकास, जलवायु के प्रति लचीलापन और अनुकूलन, संसाधनों की कुशलता और चक्रीय अर्थव्यवस्था के साथ-साथ पर्यावरण शासन जैसे क्षेत्रों में अपनी भूमिका बढ़ाई है।
कुमार ने पर्यावरण कार्य समूह (ईडब्ल्यूजी) और जलवायु परिवर्तन तथा सतत विकास पर संपर्क समूह की ब्रिक्स के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक में चर्चा के दौरान यह टिप्पणी कीं।
ब्रिक्स ईडब्ल्यूजी की स्थापना 2015 में मॉस्को में ब्रिक्स पर्यावरण मंत्रियों की पहली बैठक के दौरान की गई थी। इसकी परिकल्पना संगठन के एक ऐसे मंच के तौर पर की गई, जहां सदस्य देश पर्यावरण से जुड़ी बुनियादी प्राथमिकताओं पर ध्यान दे सकें, अपने अनुभव साझा कर सकें, बेहतरीन तौर-तरीकों का आदान-प्रदान कर सकें और सामूहिक कार्रवाई को मजबूत बना सकें।
जलवायु परिवर्तन और सतत विकास पर संपर्क समूह की स्थापना 2024 में ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच जलवायु परिवर्तन के मुद्दों पर सहयोग के लिए एक तंत्र के रूप में की गई थी।
सोमवार को ‘भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026’ को मुख्य थीम , ‘लचीलेपन, नवोन्मेष, सहयोग और निरंतरता के लिए निर्माण’के तहत आयोजित किया गया।
मंत्रालय के मुताबिक ब्रिक्स पर्यावरण मंत्रियों की 12वीं बैठक मंगलवार को आयोजित की जाएगी।
भाषा धीरज नरेश
नरेश