नयी दिल्ली, 24 फरवरी (भाषा) केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नये प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) परिसर में अपनी पहली बैठक में यह संकल्प लिया कि सेवा तीर्थ में लिया गया हर निर्णय 140 करोड़ देशवासियों के प्रति सेवा-भाव से प्रेरित होगा और राष्ट्र-निर्माण के व्यापक लक्ष्य से जुड़ा होगा।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में, यह संकल्प भी लिया गया कि संवैधानिक मूल्य उस नैतिक प्रतिबद्धता की अभिव्यक्ति है, जो शासन को नागरिक की गरिमा, समानता और न्याय से जोड़ती है।
सेवा तीर्थ की कार्य-संस्कृति में यही भावना निहित होगी, जहां हर नीति संविधान की मूल भावना के अनुरूप होगी और हर निर्णय देशवासियों की आकांक्षाओं के प्रति उत्तरदायी होगा।
यह बैठक एवं यह भवन नये भारत के नवनिर्माण की एक स्पष्ट अभिव्यक्ति है।
एक सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, ‘‘इस शुरूआत के साथ, हम उस भविष्य का स्वागत कर रहे हैं, जिसके निर्माण में सदियों का श्रम लगा है। आजादी के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) साउथ ब्लॉक में इतने दशकों तक सरकारों ने विरासत को संभाला और भविष्य के सपने देखे।’’
इसमें कहा गया है, ‘‘हमने एक ऐसे भारत के सपने देखे, जिसकी सोच स्वदेशी हो, स्वरूप आधुनिक हो, और सामर्थ्य अनंत हो। आज यह सेवातीर्थ उसी संकल्पना का वह मूर्त रूप है जो लोकतंत्र की जननी के रूप में भारत के गौरव को बढ़ाएगा।’’
भाषा सुभाष पवनेश
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