कलकत्ता उच्च न्यायालय ने संदेशखालि की कथित पीड़िताओं के बयान उसके समक्ष रखने की अनुमति दी

Ads

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने संदेशखालि की कथित पीड़िताओं के बयान उसके समक्ष रखने की अनुमति दी

  •  
  • Publish Date - March 7, 2024 / 05:45 PM IST,
    Updated On - March 7, 2024 / 05:45 PM IST

कोलकाता, सात मार्च (भाषा) कलकत्ता उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को याचिकाकर्ता को आवेदन/हलफनामा के जरिये संदेशखालि की महिलाओं को अपनी शिकायतें अदालत के संज्ञान में लाने की अनुमति दे दी।

संदेशखालि में महिलाओं के साथ अत्याचार और जमीन कब्जाने के मामले में स्वत: संज्ञान लेकर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही खंडपीठ के समक्ष याचिकाकर्ता प्रियंका टिबरेवाल ने कहा कि इलाके की 80 महिलाएं सुनवाई में शामिल होना चाहती हैं और अपना-अपना अनुभव साझा करना चाहती हैं।

मुख्य न्यायाधीश टीएस शिवगणनम की अध्यक्षता वाली पीठ ने माना कि सभी 80 महिलाओं को अदालत में लाना मुश्किल होगा। इसके साथ ही टिबरेवाल को एक आवेदन/पूरक हलफनामा दायर करने की अनुमति दी, जिसके जरिये कथित पीड़िताएं अपनी आपबीती अदालत के रिकॉर्ड पर ला सकती हैं।

इस पीठ में न्यायमूर्ति हिरण्मय भट्टाचार्य भी शामिल हैं। अदालत ने निर्देश दिया कि पीड़ितों के बयान को उचित तरीके से सत्यापित किया जाना चाहिए और उनकी पहचान भी स्थापित होनी चाहिए।

पीठ ने निर्देश दिया कि कथित पीड़ितों का बयान स्थानीय भाषा में होगा इसलिए याचिकाकर्ता को उसका अनुवादित प्रति अदालत के समक्ष रखना चाहिए।

एक अन्य याचिकाकर्ता और वकील अलख आलोक श्रीवास्तव ने अदालत से गुहार लगाई कि संदेशखालि में यौन उत्पीड़न और जमीन कब्जे के मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को स्थानांतरित की जाए।

मुख्य आरोपी शाहजहां शेख के वकील ने अदालत से कहा कि वह याचिका में लगाए गए आरोपों पर जवाब दाखिल करना चाहते हैं।

श्रीवास्तव ने अर्जी पर आपत्ति जताई और कहा कि जांच स्थानांतरित करने के आवेदन पर आरोपी को अपना पक्ष पेश करने का अधिकार नहीं है।

अदालत ने श्रीवास्तव के तर्क को स्वीकार किया और आरोपी को तीन रिट याचिकाओं- संदेशखालि से जुड़ी एक स्वत: संज्ञान की और दो जनहित याचिकाओं पर हलफनामा दाखिल करने की स्वतंत्रता दी।

अदालत ने पश्चिम बंगाल सरकार, भारत सरकार और सीबीआई को भी मामले में अपना-अपना हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।

अदालत ने निर्देश दिया कि अब इन चारों मामलों की सुनवाई चार अप्रैल को होगी।

पीठ ने रेखांकित किया कि अदालत द्वारा नियुक्त न्याय मित्र ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि इलाके में बेगुनाह लोगों से जबरन ली गई जमीन में आरोपी मत्स्यपालन कर रहे हैं और जमीन वापस करने पर भी वे सालों तक उसपर खेती नहीं कर सकेंगे।

अदालत ने पश्चिम बंगाल के कृषि विभाग को निर्देश दिया कि वह उस प्रक्रिया के संबंध में रिपोर्ट दाखिल करे जो राज्य सरकार उक्त जमीन को मुक्त कराने और वापस उसके मूल मालिकों/पट्टेदारों को लौटाने के लिए अपनाती है।

न्याय मित्र जयंत नारायण चटर्जी ने ग्रामीणों की जमीन हड़पने और महिलाओं के यौन उत्पीड़न के आरोपों को लेकर अदालत के समक्ष रिपोर्ट दर्ज की है।

भाषा धीरज माधव

माधव