इंफाल, 22 सितंबर (भाषा) मणिपुर के मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह ने मंगलवार को कहा कि जातीय हिंसा से राज्य की अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है और विकास कार्यों में तेजी लाने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।
सिंह ने कहा कि बातचीत के जरिए समस्याओं का समाधान किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि पिछले तीन वर्षों में राज्य को राजस्व संग्रह में करीब 1,300 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
घाटी में रहने वाले मेइती और पहाड़ी इलाकों में रहने वाले कुकी समुदायों के बीच मई 2023 में शुरू हुए जातीय संघर्ष में कम से कम 306 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 49 लोग अब भी लापता हैं और हजारों लोग बेघर हो गए हैं।
जातीय संघर्ष के बाद राज्य की आर्थिक स्थिति पर बात करते हुए सिंह ने कहा कि इस “अभूतपूर्व स्थिति” का राज्य की अर्थव्यवस्था पर काफी असर पड़ा है।
वित्त वर्ष 2023-24 में राज्य को जीएसटी संग्रह में करीब 475 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
उन्होंने कहा, “पिछले तीन वर्षों में राज्य के राजस्व संग्रह में कुल करीब 1,300 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।”
उन्होंने कहा कि बंद और नाकेबंदी का आम लोगों, खासकर दिहाड़ी मजदूरों और रोजाना की आर्थिक गतिविधियों पर निर्भर लोगों पर असर पड़ता है। मुख्यमंत्री ने लोगों से अपनी शिकायतें दर्ज कराने के लिए अपने-अपने विधायकों और सरकार से संपर्क करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि सरकार के दरवाजे “बातचीत के लिए खुले हैं” और “समस्याओं का समाधान चर्चा के जरिए किया जा सकता है।”
उन्होंने कहा, “आर्थिक विकास के लिए सामूहिक प्रयासों की जरूरत है। मणिपुर के लोगों को शांति से मिलकर काम करना चाहिए और राज्य के विकास तथा 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में योगदान देना चाहिए।”
सिंह ने ये बातें इंफाल पश्चिम जिला प्रशासन द्वारा खोयाथोंग बहुउद्देशीय सामुदायिक सभागार में आयोजित ‘सेवा संकल्प अभियान’ कार्यक्रम में कहीं।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विभिन्न सरकारी विभागों और संस्थानों की योजनाओं एवं सेवाओं से संबंधित 30 से अधिक सेवा काउंटर और स्टॉल पर मौजूद लोगों से बातचीत की।
उन्होंने कहा कि एक महीने तक चलने वाला यह कार्यक्रम विधानसभा क्षेत्रों में आयोजित किया जाएगा ताकि यह पता लगाया जा सके कि सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंच रहा है या नहीं।
मुख्यमंत्री ने कहा, “जहां भी योजनाओं के लाभ पहुंचाने में कमियां पाई जाती हैं, वहां सरकार जरूरी कदम उठाती है ताकि पात्र लाभार्थियों को उनका हक मिल सके।”
भाषा अमित नरेश
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