कावेरी जल विवाद : उदयनिधि स्टालिन ने तमिलनाडु सरकार पर साधा निशाना

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कावेरी जल विवाद : उदयनिधि स्टालिन ने तमिलनाडु सरकार पर साधा निशाना

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  • Publish Date - August 3, 2026 / 08:27 PM IST,
    Updated On - August 3, 2026 / 08:27 PM IST

तंजावुर, तीन अगस्त (भाषा) कर्नाटक के साथ कावेरी जल विवाद से निपटने और कृषि समुदाय की परेशानियों को लेकर तमिलनाडु विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उदयनिधि स्टालिन ने सोमवार को तंजावुर में एक प्रदर्शन का नेतृत्व करते हुए राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला।

इस बीच, द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के अध्यक्ष एम. के. स्टालिन ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि फसलों की सिंचाई हेतु कावेरी नदी में पानी की कमी के कारण डेल्टा क्षेत्र के किसानों की बदहाली के लिए टीवीके सरकार की ‘लापरवाही’ जिम्मेदार है।

बड़ी संख्या में किसानों और पार्टी कार्यकर्ताओं की भागीदारी वाले इस प्रदर्शन का आयोजन सभी कृषि ऋणों को पूरी तरह माफ करने, कर्नाटक की प्रस्तावित मेकेदातु बांध परियोजना का निर्माण रोकने के लिए तत्काल हस्तक्षेप करने और डेल्टा जिलों को आधिकारिक रूप से सूखा प्रभावित घोषित करने की मांग को लेकर किया गया था।

प्रदर्शन को संबोधित करते हुए उदयनिधि ने कावेरी नदी की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताई और कहा कि शुभ ‘आदि पेरुक्कु’ त्योहार के दौरान भी नदी रेगिस्तान जैसी दिखाई दे रही है, जबकि इस समय पारंपरिक रूप से नदियां पानी से लबालब रहती हैं।

उन्होंने कहा कि ‘कुरुवई’ फसल पहले ही बर्बाद हो चुकी है और अब किसान आगामी ‘सांबा’ खेती को लेकर गहरे संकट में हैं।

द्रमुक नेता ने मुख्यमंत्री पर ‘डमी’ नेता होने का आरोप लगाते हुए कहा कि उनमें प्रशासनिक क्षमता का अभाव है।

उन्होंने कहा कि कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के निर्देशों के अनुसार तमिलनाडु को जून में 9.9 टीएमसी और जुलाई में 32 टीएमसी, यानी कुल 42 टीएमसी पानी मिलना था, लेकिन राज्य को एक बूंद पानी भी नहीं मिला।

उदयनिधि ने आरोप लगाया, ‘‘इसके बावजूद मुख्यमंत्री चुप्पी साधे हुए हैं और कर्नाटक की कांग्रेस सरकार तथा केंद्र की भाजपा नीत सरकार से सवाल पूछने से डर रहे हैं।’’

उन्होंने प्रदर्शनकारी किसानों से निपटने के सरकार के तरीके की आलोचना करते हुए कहा कि अपनी मांगों को रखने के लिए सचिवालय की ओर मार्च कर रहे किसानों को बिना किसी उचित प्रक्रिया के गिरफ्तार कर लिया गया।

द्रमुक नेता ने मुख्यमंत्री के कर्नाटक दौरे के प्रस्ताव पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री पहले ही साफ तौर पर पानी छोड़ने से इनकार कर चुके हैं।

उदयनिधि ने राज्य सरकार द्वारा सर्वदलीय बैठक नहीं बुलाने की भी आलोचना की और कहा कि इससे केंद्र सरकार पर संयुक्त दबाव बनाने का अवसर गंवा दिया गया।

उन्होंने कहा कि इस वर्ष केवल 1.5 लाख एकड़ क्षेत्र में खेती हुई, जबकि पिछले साल छह लाख एकड़ में खेती हुई थी। इससे किसानों को करीब 2,500 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। उन्होंने प्रति एकड़ 25,000 रुपये के वित्तीय राहत पैकेज की मांग भी की।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को फसल बीमा का पूरा प्रीमियम वहन करना चाहिए और सांबा खेती (चावल की खेती) के लिए बीज, उर्वरक तथा कीटनाशक रियायती दरों पर उपलब्ध कराने चाहिए।

उदयनिधि ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ सरकार ने चुनावी वादों के विपरीत जाकर फसल ऋण माफी के लिए पात्रता की सीमा बदल दी और अंततः किसानों को राहत देने से इनकार कर दिया।

उन्होंने कहा कि यह पूर्ववर्ती द्रमुक सरकार द्वारा लागू की गई 12,000 करोड़ रुपये की ऋण माफी से बिल्कुल अलग है।

द्रमुक नेता ने कहा कि उनकी पार्टी राज्य के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और पार्टी अध्यक्ष एम. के. स्टालिन पहले ही कावेरी जल विनियमन समिति के आदेशों को लागू कराने के लिए उच्चतम न्यायालय का रुख कर चुके हैं।

एम. के. स्टालिन ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में भी तमिलनाडु सरकार पर कर्नाटक द्वारा पानी नहीं छोड़े जाने की निंदा करने में विफल रहने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पड़ोसी राज्य के सिनेमाघरों में फिल्मों के प्रदर्शन को बचाने के लिए तमिलनाडु के किसानों के हितों से समझौता किया जा रहा है।

स्टालिन ने सरकार के प्रदर्शन को ‘‘छलपूर्ण’’ बताते हुए आरोप लगाया कि सत्ता में आने के बाद तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) का नेतृत्व अपने उस चुनावी वादे से पीछे हट गया, जिसमें पूर्ण कृषि ऋण माफी की बात कही गई थी।

कर्नाटक में प्रस्तावित मेकेदातु बांध परियोजना को लेकर हाल में हुई सर्वदलीय बैठक का उल्लेख करते हुए स्टालिन ने सवाल किया कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री राज्य के अधिकारों की रक्षा के लिए ऐसी ही बैठक बुलाने से क्यों हिचक रहे हैं और इसके बजाय कर्नाटक के साथ बातचीत की कोशिश कर रहे हैं।

स्टालिन ने तत्काल पूर्ण कृषि ऋण माफी, विशेष कुरुवई राहत पैकेज और डेल्टा जिलों को सूखा प्रभावित क्षेत्र घोषित करने की मांग की।

भाषा रवि कांत रवि कांत नरेश

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