नयी दिल्ली, 17 सितंबर (भाषा) केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) ने जेल में बंद कार्यकर्ता उमर खालिद पर आधारित एक वृत्तचित्र के आईआईआईटी-हैदराबाद में प्रस्तावित प्रदर्शन पर बृहस्पतिवार को आपत्ति जताई।
बोर्ड ने कहा कि बिना-प्रमाणन वाली फिल्म का सार्वजनिक प्रदर्शन ‘सिनेमैटोग्राफ अधिनियम’ का उल्लंघन होगा, जब तक कि इसके लिए कोई विशेष छूट न हासिल की गई हो।
ललित वाछानी के निर्देशन में बनी वृत्तचित्र ‘प्रिजनर नंबर 626710 इज प्रेजेंट’ शुक्रवार रात आठ बजे संस्थान के केआरबी प्रेक्षागृह में छात्रों के एक समूह द्वारा प्रदर्शित की जानी थी।
सूत्रों ने बताया कि छात्रों ने अब इसके प्रदर्शन को रद्द करने का फैसला किया है।
सीबीएफसी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘ऐसी वृत्तचित्र का सार्वजनिक प्रदर्शन जिसे अभी तक सीबीएफसी द्वारा प्रमाणित नहीं किया गया है, सिनेमैटोग्राफ अधिनियम का उल्लंघन है – जब तक कि अधिनियम के तहत कोई विशेष छूट न ली गई हो।’
आईआईआईटी-हैदराबाद को ‘टैग’ करते हुए बोर्ड ने कहा कि संस्थान के अधिकारी ‘आवश्यक कार्रवाई के लिए इस पर संज्ञान ले सकते हैं।’
सीबीएफसी केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय के तहत काम करता है। इस मुद्दे पर आईआईआईटी-हैदराबाद को भेजे गए ईमेल का कोई जवाब नहीं मिला।
बेंगलुरु स्थित नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (एनएलएसआईयू) की छात्र-संचालित ‘लॉ एंड सोसाइटी कमेटी’ ने 14 सितंबर को ‘राजनीतिक बंदी दिवस’ और उमर खालिद की कैद के छह साल पूरे होने पर एक वृत्तचित्र का प्रदर्शन निर्धारित किया था।
हालांकि, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने इसे राजनीतिक प्रचार बताते हुए विरोध किया, जिसके बाद छात्र समिति ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए कार्यक्रम को स्थगित कर दिया।
भाषा
सुमित पारुल
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