CBSE Chairman Rahul Singh Removed : CBSE में सरकार का बड़ा एक्शन! रिजल्ट विवाद के बीच चेयरमैन और सचिव हटाए गए, OSM गड़बड़ियों की जांच शुरू
सीबीएसई में बड़ा प्रशासनिक बदलाव करते हुए केंद्र सरकार ने चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का ट्रांसफर कर दिया है। उनकी जगह वरिष्ठ IAS अधिकारी प्रशांत सीताराम लोखंडे को नया चेयरमैन और वरुण भारद्वाज को नया सचिव नियुक्त किया गया है। यह कार्रवाई विवादित ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम और 10वीं-12वीं के रिजल्ट के बाद उठे सवालों के बीच हुई है। सरकार ने पूरे मामले की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन भी कर दिया है।
CBSE Chairman Rahul Singh Removed / Image Source : X
- CBSE चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का ट्रांसफर
- OSM विवाद और रिजल्ट शिकायतों के बीच सरकार का बड़ा फैसला
- जांच के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित, नए चेयरमैन-सचिव की नियुक्ति
नई दिल्ली : CBSE Chairman Rahul Singh Removed केंद्र सरकार ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। सरकार ने सीबीएसई के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता को उनके पदों से हटाते हुए दोनों का ट्रांसफर कर दिया है। इस कार्रवाई के तुरंत बाद सीनियर IAS लोखंडे प्रशांत सीताराम को सीबीएसई का नया चेयरमैन और वरुण भारद्वाज को बोर्ड का नया सचिव नियुक्त किया गया है। साथ ही साथ सरकार ने OSM में गड़बड़ियों की जांच के लिए एक कमेटी का गठन भी कर दिया है।
क्या है पूरा मामला ?
IAS Lokhande Prashant Sitaram New CBSE Chairman इस अचानक हुई कार्रवाई के पीछे सीबीएसई के विवादित ‘ऑन स्क्रीन मार्किंग’ के टेंडर को मुख्य वजह माना जा रहा है। सरकार ने इस पूरे मामले और विवादित टेंडर की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। दरअसल, सीबीएसई ने इसी साल 13 मई को 12वीं कक्षा का रिजल्ट जारी किया था, जिसके बाद देश भर के कई छात्रों ने अपने नंबरों को लेकर गंभीर शिकायतें दर्ज कराई थीं।
सीबीएसई सुर्खियों में क्यों है?
CBSE OSM Controversy: सीबीएसई की कक्षा 10वीं और 12वीं के परिणाम घोषित होने के बाद छात्रों की ओर से स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं को देखने में आ रही समस्याओं की शिकायत के बाद विवादों में है। Secretary Himanshu Gupta Transferred कई उम्मीदवारों ने दावा किया कि उन्हें धुंधले आंसर शीट, गायब अनुभाग और बोर्ड की ऑनलाइन सेवाओं का उपयोग करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। स्थिति तब और बिगड़ गई जब ओएसएम प्लेटफॉर्म पर सवाल उठाए गए। बात केवल कॉपियों की जांच तक सीमित नहीं रही। बल्कि कॉपियों को ऑनलाइन जांचने वाले डिजिटल सिस्टम (OSM) पर भी सवाल उठने लगे। लोगों ने पूछा कि जिस कंपनी को कॉपियां जांचने का कंट्रैक्ट दिया गया, उसे कैसे चुना गया? क्या छात्रों का डेटा और नंबर ऑनलाइन सुरक्षित है? दोबारा कॉपी जांचने के काम में इतनी देरी क्यों हो रही है?
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