पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे: केंद्र ने न्यायालय से कहा, सभी मुद्दे दो सप्ताह में सुलझा लिए जाएंगे

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पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे: केंद्र ने न्यायालय से कहा, सभी मुद्दे दो सप्ताह में सुलझा लिए जाएंगे

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  • Publish Date - April 7, 2026 / 07:50 PM IST,
    Updated On - April 7, 2026 / 07:50 PM IST

नयी दिल्ली, सात अप्रैल (भाषा) केंद्र सरकार ने मंगलवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि देशभर के पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने से जुड़े सभी मुद्दों को दो सप्ताह के भीतर सुलझा लिया जाएगा।

अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ को बताया कि वह इस मुद्दे की समीक्षा कर रहे हैं और इस दिशा में कई कदम उठाए जा रहे हैं।

केंद्रीय गृह सचिव भी न्यायालय में उपस्थित हुए। उच्चतम न्यायालय ने छह अप्रैल को एक आदेश में उनसे मंगलवार को अदालत में पेश होने को कहा था, ताकि थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना के क्रियान्वयन में उनकी उपयुक्त सहायता ली जा सके।

न्यायालय पुलिस थानों में चालू हालत में सीसीटीवी कैमरों की कमी से संबंधित स्वतः संज्ञान वाली एक याचिका सहित कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है।

अटॉर्नी जनरल ने पीठ को बताया, ‘‘मैं मामलों का जायजा ले रहा हूं।’’

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने पहले इस मामले में न्याय मित्र को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ बैठकें करने के लिए कहा था, और विचार-विमर्श में भारत सरकार का प्रतिनिधित्व एक अवर सचिव कर रहे थे।

उन्होंने कहा, ‘‘क्या यह अच्छा लगता है?’’

देश के शीर्ष विधि अधिकारी ने पीठ से कहा कि ‘‘दो सप्ताह के भीतर वह सुनिश्चित करेंगे कि सभी मुद्दे सुलझ जाएं, इसके लिए न्याय मित्र और अन्य अधिकारियों के साथ नियमित बैठकें की जाएंगी।’’

सोमवार को सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि यह बात सामने आई है कि केरलम (केरल) ने एक बहुत अच्छा सॉफ्टवेयर विकसित किया है और उन्होंने इसे पूरी तरह से लागू कर दिया है।

पीठ ने कहा, ‘‘तो, हम अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (जो सोमवार को केंद्र की ओर से पेश हुए) से पूछ रहे हैं कि आप इसे सभी राज्यों के लिए समान रूप से क्यों नहीं लागू कर सकते? हर राज्य द्वारा अपना खुद का सॉफ्टवेयर बनाये तथा पैसा और समय खर्च करे, इसके बजाय पहले से ही तैयार सॉफ्टवेयर मौजूद है जो उपयोग में है।’’

शीर्ष अदालत ने कहा कि न्यायमित्र के अनुसार, केरल, मध्यप्रदेश और राजस्थान ने पहले ही केंद्रीकृत डैशबोर्ड स्थापित कर लिए हैं।

पीठ ने कहा, ‘‘आप सभी राज्यों को दिशानिर्देश जारी कर उनसे अनुरोध कर सकते हैं या उन्हें निर्देश दे सकते हैं कि वे केरल के समान ही पद्धति का पालन करें।’’

वेंकटरमणी ने कहा कि वह न्याय मित्र और अधिकारियों के साथ बैठकें करेंगे।

पीठ ने कहा, ‘‘ निर्देशों पर, अटार्नी जनरल ने कहा है कि वह दो सप्ताह के भीतर न्याय मित्र और अन्य संबंधित अधिकारियों के साथ नियमित बैठकें करके यह सुनिश्चित करेंगे कि सभी मुद्दों का समाधान हो जाए। इस मामले को 28 अप्रैल के लिए सूचीबद्ध किया जाए।’’

न्यायालय ने कहा कि न्याय मित्र सुनवाई की अगली तारीख तक एक नयी वस्तु स्थिति रिपोर्ट दाखिल कर सकते हैं और केंद्र भी, यदि आवश्यक हो, तो हलफनामा दाखिल कर सकता है।

पीठ ने कहा कि भविष्य में गृह सचिव की व्यक्तिगत उपस्थिति आवश्यक नहीं होगी, जब तक कि इसकी पूरी तरह से जरूरत न हो।

शीर्ष अदालत ने दिसंबर 2020 में निर्देश दिया था कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रत्येक पुलिस थाने, सभी प्रवेश और निकास बिंदुओं, मुख्य द्वार, हवालात, गलियारों, लॉबी और स्वागत कक्ष के साथ-साथ हवालात के बाहर के क्षेत्रों में भी सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं ताकि कोई भी हिस्सा सुरक्षा से वंचित न रहे।

न्यायालय ने कहा कि सीसीटीवी प्रणाली में ‘नाइट विजन’ होना चाहिए और इसमें ऑडियो के साथ-साथ वीडियो फुटेज भी होनी चाहिए।

शीर्ष अदालत ने केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए ऐसी प्रणाली खरीदना अनिवार्य कर दिया है जो कम से कम एक वर्ष तक डेटा को सुरक्षित रख सकें।

भाषा सुभाष पवनेश

पवनेश