केंद्र ने उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश की दो रेल परियोजनाओं को मंजूरी दी

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केंद्र ने उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश की दो रेल परियोजनाओं को मंजूरी दी

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  • Publish Date - April 18, 2026 / 07:38 PM IST,
    Updated On - April 18, 2026 / 07:38 PM IST

नयी दिल्ली, 18 अप्रैल (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने शनिवार को रेल मंत्रालय की लगभग 24,815 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली दो परियोजनाओं को मंजूरी दी।

इन परियोजनाओं में उत्तर प्रदेश में 403 किलोमीटर लंबी गाजियाबाद-सीतापुर तीसरी और चौथी लाइन और आंध्र प्रदेश में 198 किलोमीटर लंबी राजामुंदरी-विशाखापत्तनम तीसरी और चौथी लाइन शामिल हैं।

सरकार के एक बयान के अनुसार लाइन क्षमता में इस बढ़ोतरी से आवागमन में उल्लेखनीय सुधार होगा, भारतीय रेलवे की परिचालन दक्षता और सेवा विश्वसनीयता में वृद्धि होगी।

बयान में कहा गया, ‘‘इन रेल खंड पर पटरियों की संख्या लाइन बढ़ाने से परिचालन व्यवस्थित होगी और भीड़भाड़ कम करने में मदद मिलेगी। ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के एक नये भारत की परिकल्‍पना के अनुरूप हैं। इसका उद्देश्य क्षेत्र के व्यापक विकास के माध्यम से इस क्षेत्र के लोगों को आत्मनिर्भर बनाना है, जिससे उनके रोजगार/स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे।’’

बयान में कहा गया है, ‘‘ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय योजना का हिस्सा हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य एकीकृत योजना और हितधारकों के परामर्श के माध्यम से बहु स्तरीय संपर्क और लॉजिस्टिक दक्षता को बढ़ाना है। इन परियोजनाओं से लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित होगी।’’

उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश राज्यों के 15 जिलों से गुजरने वाली ये दो परियोजनाएं भारतीय रेल के मौजूदा नेटवर्क को लगभग 601 किलोमीटर तक बढ़ाएंगी।

दोनों परियोजनाओं के लाभों को रेखांकित करते हुए सरकार ने कहा कि ये कोयला, अनाज, सीमेंट, लोहा और इस्पात, कंटेनर, उर्वरक, चीनी, रासायनिक लवण, चूना पत्थर आदि जैसी वस्तुओं के परिवहन के लिए आवश्यक मार्ग हैं।

सरकार ने कहा, ‘‘रेलवे पर्यावरण के अनुकूल और ऊर्जा कुशल परिवहन का साधन होने के नाते, जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने और देश की परिवहन लागत को कम करने में मदद करेगा, जिससे कार्बन डाइऑक्‍साइड उत्सर्जन में कमी आएगी, जो 7.33 करोड़ वृक्षारोपण के बराबर है।’’

बयान में कहा गया है कि इन नयी लाइन के निर्माण से देश भर के कई प्रमुख पर्यटन स्थलों तक रेल संपर्क में सुधार होगा, जिनमें दूधेश्वरनाथ मंदिर, गढ़मुक्तेश्वर गंगा घाट, दरगाह शाह विलायत जामा मस्जिद (अमरोहा), नैमिषारण्य (सीतापुर), अन्नवरम, अंतर्वेदी, द्रक्षरामम आदि शामिल हैं।

गाजियाबाद-सीतापुर रेलखंड पर इस समय दोहरी लाइन है, जो दिल्ली-गुवाहाटी उच्च घनत्व नेटवर्क का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। नयी पटरियों के फायदे के बारे में सरकार ने कहा कि यह परियोजना देश के उत्तरी और पूर्वी क्षेत्रों के बीच संपर्क सुधारने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इस खंड की मौजूदा लाइन क्षमता का 168 प्रतिशत तक उपयोग हो रहा है औ परियोजना शुरू नहीं होने की स्थिति में इसके 207 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है।

यह रेल लाइन उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद, हापुड, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी और सीतापुर जिलों से होकर गुजरती है। परियोजना का मार्ग गाजियाबाद (मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल), मुरादाबाद (पीतल के बर्तन और हस्तशिल्प), बरेली (फर्नीचर, वस्त्र, इंजीनियरिंग), शाहजहांपुर (कालीन और सीमेंट से संबंधित उद्योग) और रोजा (तापीय विद्युत संयंत्र) जैसे प्रमुख औद्योगिक केंद्रों से होकर गुजरता है।

राजामुंदरी (निदादावोलु) – विशाखापत्तनम (दुव्वाडा) खंड हावड़ा – चेन्नई उच्च घनत्व नेटवर्क (एचडीएन) का हिस्सा है। प्रस्तावित परियोजना मार्ग के चौगुने विस्तार की पहल का हिस्सा है।

सरकार ने कहा कि यह परियोजना आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी, कोनासीमा, काकीनाडा, अनाकापल्ले और विशाखापत्तनम जिलों से होकर गुजरती है।

बयान में कहा गया है, ‘‘विशाखापत्तनम को आकांक्षी जिला कार्यक्रम में एक आकांक्षी जिला माना गया है। यह पूर्वी तट पर स्थित विशाखापत्तनम, गंगावरम, मछलीपटनम और काकीनाडा जैसे प्रमुख पत्तनों को जोड़ती है।’’

इसमें कहा गया है, ‘‘परियोजना का मार्ग पूर्वी तटरेखा के साथ-साथ चलता है और यह पूर्वी तटीय रेल गलियारे के सबसे व्यस्त, मुख्य रूप से माल ढुलाई के खंडों में से एक है।’’

बयान में कहा गया है कि इस खंड की लाइन क्षमता का उपयोग पहले ही 130 प्रतिशत तक पहुंच चुका है, जिसके कारण बार-बार जाम और परिचालन में देरी हो रही है।

सरकार ने कहा, ‘‘क्षेत्र में पत्तनों और उद्योगों के प्रस्तावित विस्तार के कारण लाइन की क्षमता में और वृद्धि होने की उम्मीद है।’’

भाषा अमित धीरज

धीरज