चेन्नई, 13 अप्रैल (भाषा) तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने सोमवार को दावा किया कि केंद्र सरकार ने राज्य से धान पर मौजूदा बोनस नीति की समीक्षा करने और उसे बंद करने पर विचार करने के लिए कहा था। उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से सवाल किया कि क्या वह इस सिलसिले में लिखे गए पत्र को सार्वजनिक करेंगी।
हालांकि, सीतारमण ने कहा कि स्टालिन का यह आरोप कि केंद्र सरकार ने तमिलनाडु को धान की खेती के लिए प्रोत्साहन राशि न देने का निर्देश दिया है “तथ्यात्मक रूप से बेबुनियाद, राजनीति से प्रेरित और राज्य के किसानों को गुमराह करने के लिए जानबूझकर किया गया झूठा दावा है।”
केंद्रीय वित्त मंत्री ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में, नौ जनवरी 2026 के एक पत्र का हवाला देते हुए कहा कि न केवल तमिलनाडु, बल्कि सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को सुझाव दिया गया था कि (फसल पर) राज्य की बोनस नीतियों को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप बनाया जाए।
पत्र में राज्यों से दलहन, तिलहन और बाजरा की खेती को बढ़ावा देने के लिए अपनी बोनस नीति को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप करने आग्रह किया गया था, जो पोषण सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और टिकाऊ कृषि के लिए राष्ट्रीय प्राथमिकताओं से मेल खाए।
सीतारमण ने कहा, “यह पत्र राज्यों के लिए एक सलाह थी, निर्देश नहीं।”
उन्होंने स्टालिन के हालिया भाषण पर भी आपत्ति जताई, जिसमें उन्होंने राज्य सरकारों की ओर से दिए जाने वाले बोनस के सिलसिले में वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग द्वारा जारी एक पत्र का जिक्र किया था।
सीतारमण ने कहा कि वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग के केंद्रीय सचिव की ओर से सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को लिखा गया उक्त पत्र पोषण सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और टिकाऊ कृषि के लिए राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप दलहन, तिलहन और बाजरा की खेती को बढ़ावा देने के वास्ते अपनी-अपनी बोनस नीति तैयार करने से संबंधित था।
स्टालिन ने ‘एक्स’ पर अपने पोस्ट में सीतारमण को टैग करते हुए कहा, “आपके मंत्रालय की ओर से तमिलनाडु के मुख्य सचिव को भेजे गए पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि चूंकि, धान पर दिए जाने वाले अतिरिक्त बोनस के कारण राज्य में बंपर पैदावार हुई है, इसलिए राज्य सरकार को बोनस बंद करने पर विचार करना चाहिए।”
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि मुख्य सचिव ने उक्त पत्र में लिखी बातों के अलावा कुछ भी नहीं कहा। उन्होंने कहा, “मुझे भी ऐसा कुछ कहने की कोई जरूरत नहीं है।”
स्टालिन ने कहा, “आपने अपने पोस्ट में दावा किया है कि धान की खेती करने वाले किसानों को एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) से अधिक बोनस देने का अधिकार राज्य सरकारों के पास है और किसी ने भी उनका यह अधिकार नहीं छीना है, लेकिन हमें भेजे गए पत्र में स्पष्ट रूप से राज्य सरकार की मौजूदा बोनस नीति की समीक्षा करने और धान पर बोनस बंद करने पर विचार करने के लिए कहा गया है। अगर आपका वर्तमान दावा सही है, तो क्या आप वह पत्र सार्वजनिक करेंगी?”
सीतारमण ने कहा कि यह पत्र राज्यों को अपनी कृषि नीतियों को व्यापक राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप करने के उद्देश्य से लिखा गया था।
उन्होंने कहा कि ऐसे लक्ष्यों के साथ तालमेल स्थापित करना राज्यों पर बोझ नहीं है बल्कि यह एक साझा जिम्मेदारी है, जो किसानों, उपभोक्ताओं और पूरे देश के हित में है।
वित्त मंत्री ने कहा, “इसे थोपा गया बताना या इसके उद्देश्य को जानबूझकर गलत रूप से समझना तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने के समान है।”
भाषा पारुल सुभाष
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