नयी दिल्ली, 19 जनवरी (भाषा) पांच केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल या प्रशासकों को कैंसर और मधुमेह जैसी बीमारियों के इलाज के लिए चमत्कारिक गुणों और उपायों का दावा करने वाले भ्रामक विज्ञापनों से जुड़े परिसरों की तलाशी लेने या रिकॉर्ड जब्त करने की अनुमति अधिकारियों को देने का अधिकार होगा।
गृह मंत्रालय द्वारा हाल ही में राजपत्र में अधिसूचित एक आदेश के तहत सरकार ने जम्मू कश्मीर, लक्षद्वीप, चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव तथा पुडुचेरी जैसे केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपालों या प्रशासकों को ये अधिकार सौंपे हैं।
आदेश में कहा गया है, ‘‘राष्ट्रपति की ओर से इसके माध्यम से यह निर्देश दिया जाता है कि लक्षद्वीप, चंडीगढ़, दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव, पुडुचेरी और जम्मू कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासक (चाहे उन्हें उपराज्यपाल या प्रशासक कहा जाए) राष्ट्रपति के नियंत्रण के अधीन और अगले आदेश तक, अपने-अपने केंद्र शासित प्रदेशों में औषधि एवं चमत्कारिक उपचार (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम 1954 (1954 का 21) के तहत राज्य सरकार की शक्तियों का प्रयोग करेंगे और उसके कार्यों का निर्वहन करेंगे।’’
औषधि एवं चमत्कारी उपचार (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम, 1954 और उसके नियमों में छपे और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में प्रकाशित होने वाली दवाओं और औषधीय पदार्थों, -जिसमें आयुष दवाएं भी शामिल हैं- से जुड़े भ्रामक विज्ञापनों और बढ़ा-चढ़ाकर किए गए दावों पर रोक लगाने के प्रावधान हैं।
यह अधिनियम ‘‘राज्य सरकारों’’ द्वारा अधिकृत राजपत्रित अधिकारियों को कथित भ्रामक या अनुचित विज्ञापनों से जुड़े किसी भी परिसर में प्रवेश करने, तलाशी लेने, रिकॉर्ड की जांच करने या उन्हें जब्त करने तथा उल्लंघन के मामलों में कार्रवाई शुरू करने का अधिकार देता है।
पांच केंद्र शासित प्रदेशों के मामले में अब उपराज्यपाल या प्रशासक अधिकारियों को ये कार्रवाइयां करने के लिए अधिकृत करने का अधिकार रखेंगे।
भाषा अमित मनीषा
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